गोरखपुर: साइबर ठगी के शिकार युवक को मिली बड़ी राहत, तिवारीपुर पुलिस ने वापस दिलाए पूरे ₹2 लाख
यूपीआई के जरिए ठगी कर उड़ा लिए थे रुपये, पुलिस की सक्रियता से पीड़ित को मिली राहत
गोरखपुर ब्युरो कार्यालय (उत्तर प्रदेश)
गोरखपुर। बढ़ते साइबर अपराधों के बीच तिवारीपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए ऑनलाइन ठगी के शिकार एक व्यक्ति को बड़ी राहत दिलाई है। तकनीकी जांच और त्वरित कार्रवाई के जरिए पुलिस ने पीड़ित के खाते से निकाले गए पूरे ₹2 लाख रुपये वापस करा दिए, जिससे पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है।
जानकारी के मुताबिक पीड़ित के साथ यूपीआई (UPI) के माध्यम से ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटना हुई थी। अज्ञात साइबर ठगों ने झूठे प्रलोभन और फर्जी आश्वासन देकर उसके खाते से ₹2,00,000 रुपये ट्रांसफर करा लिए। ठगी का एहसास होते ही पीड़ित ने तत्काल थाना तिवारीपुर में शिकायत दर्ज कराई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस तुरंत हरकत में आई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर डॉ. कौस्तुभ के निर्देशन में चल रहे साइबर अपराध नियंत्रण अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक नगर के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक अपराध के निर्देशन में जांच शुरू की गई। क्षेत्राधिकारी कोतवाली के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व में साइबर टीम ने तकनीकी पड़ताल तेज कर दी।
जांच के दौरान उपनिरीक्षक धर्मेन्द्र कुमार यादव और उपनिरीक्षक हिमांशु शेखर ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का पता लगाया, जिनके माध्यम से रकम ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद संबंधित बैंकों और वित्तीय संस्थानों से तत्काल संपर्क कर संदिग्ध खातों को ब्लॉक कराया गया और लेनदेन को ट्रेस किया गया।
इस कार्रवाई में बजाज फाइनेंस लिमिटेड सहित अन्य वित्तीय संस्थानों का भी सहयोग मिला। पुलिस की तेज कार्रवाई के चलते ठगी की पूरी रकम सुरक्षित कर ली गई और बाद में उसे पीड़ित के खाते में वापस ट्रांसफर करा दिया गया।
इस सफलता में तिवारीपुर थाने की साइबर टीम की अहम भूमिका रही। टीम में प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार सिंह, अतिरिक्त निरीक्षक गजेंद्र बहादुर सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजवीर सिंह, साइबर नोडल उपनिरीक्षक धर्मेंद्र कुमार यादव, उपनिरीक्षक हिमांशु शेखर, मुख्य आरक्षी शैलेंद्र कुमार यादव तथा महिला आरक्षी रागिनी वर्मा शामिल रहीं।
गोरखपुर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी के साथ ऑनलाइन ठगी होती है तो घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें ।


Comments