Lucknow POCSO Court बाल यौन उत्पीड़न मामले में दोषी को  कठोर कारावास की सजा

दोषी सेनी उर्फ़ श्रीराम को विशेष न्यायालय ने सुनाई कठोर कारावास की सजा

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सचिन बाजपेयी -लखनऊ, 

बाल यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में लखनऊ की विशेष पॉक्सो अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त सेनी उर्फ़ श्रीराम को भारतीय दंड संहिता  और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषी करार देकर कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो, मोहम्मद कमरूज़्ज़मा खान द्वारा सुनाया गया फैसला 

क्या है मामला


अभियुक्त सेनी उर्फ़ श्रीराम (आयु लगभग 30 वर्ष), निवासी ग्राम हरदा मजरा अकड़रिया, थाना इटौंजा, लखनऊ, के विरुद्ध यह मामला सत्र परीक्षण संख्या 212/2018 के रूप में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 14 जनवरी 2018 की रात लगभग 3:30 बजे अभियुक्त ने पीड़िता के पिता के घर में अवैध रूप से प्रवेश कर नाबालिग पीड़िता के साथ छेड़छाड़ की। विरोध करने पर उसने पीड़िता और उसकी माँ को जान से मारने की धमकी दी।

इस घटना के बाद अभियुक्त पर की धारा 452 (घर में घुसपैठ) 354 (छेड़छाड़),506 (आपराधिक धमकी) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 (यौन उत्पीड़न) में आरोप लगाए गए।

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साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि

न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाहों—विशेषकर पीड़िता और उसकी माँ—के बयानों को विश्वसनीय मानते हुए, साथ ही अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को अपराध का दोषी ठहराया। न्यायाधीश ने कहा कि प्रस्तुत प्रमाण अभियुक्त की संलिप्तता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।

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कठोर कारावास और अर्थदंड

विशेष न्यायालय ने अभियुक्त को विभिन्न धाराओं के तहत निम्न सजा सुनाई—
धारा 354 के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास व 2,000 अर्थदंड (न देने पर 15 दिन साधारण कारावास)।
धारा 452  के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 10,000 अर्थदंड  (न देने पर 1 माह साधारण कारावास)।
धारा 506  के तहत वर्ष का कठोर कारावास व 2,000 अर्थदंड (न देने पर 15 दिन साधारण कारावास)।
पॉक्सो धारा 7/8 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास व 5,000 अर्थदंड (न देने पर 15 दिन साधारण कारावास)।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएँ साथ-साथ  चलेंगी।

पीड़िता को मिलेगा अर्थदंड

न्यायालय ने आदेश दिया है कि दोषी से वसूले गए सभी अर्थदंड की राशि पीड़िता को पुनर्वास सहायता के रूप में प्रदान की जाए। साथ ही निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  लखनऊ को भेजकर पीड़िता को न्यायालय के नियम अनुसार क्षतिपूर्ति दिलाए जाने का निर्देश दिया गया।
अभियुक्त को सजा काटने हेतु जिला कारागार, लखनऊ भेजने के आदेश भी पारित किए गए।

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समाज के लिए कड़ा संदेश

फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि बाल यौन अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह आदेश समाज को यह स्पष्ट संदेश देता है कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर कानून द्वारा सख़्त कार्रवाई अनिवार्य है।

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