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मलिहाबाद में महिला बीएलओ का उत्पीड़न ग्राम प्रधान पर सरकारी कार्य में बाधा डालने का गंभीर आरोप
प्रधान रामशंकर के इशारे पर महिला ने दी गाली, उपजिलाधिकारी से FIR की मांग
लखनऊ। मलिहाबाद,
लखनऊ में एसआईआर (SIR) एवं प्रगणन जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्य में जुटी एक महिला बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को ग्राम प्रधान और उनके एक सहयोगी के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। प्रार्थी बीएलओ ने ग्राम प्रधान रामशंकर पर न केवल कार्य में बाधा डालने, बल्कि उनके कहने पर एक अन्य महिला द्वारा गाली-गलौज किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। यह शिकायत उपजिलाधिकारी (SDM) मलिहाबाद को लिखित रूप में सौंपी गई है, जिसमें तुरंत कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
सरकारी कार्य के दौरान अपमान और बाधा
शिकायतकर्ता सिया दुलारी (बीएलओ, म.वि. बिराहिमपुर ) अपने सहयोगी विमलेश सिंह के साथ ग्राम पंचायत बिराहिमपुर कलां में चुनावी प्रक्रिया से संबंधित सरकारी दायित्वों का निर्वहन कर रही थीं। प्राप्त शिकायत पत्र में कहा गया है कि ग्राम प्रधान रामशंकर और उनके सहयोगी इस कार्य में लगातार बाधा डाल रहे थे और बीएलओ को परेशान कर रहे थे।
अपमानजनक टिप्पणी: बीएलओ सिया दुलारी ने आरोप लगाया है कि प्रधान रामशंकर के सीधे कहने पर ऊषा पत्नी बाबूलाल ने उन्हें अपमानित किया। ऊषा बाबूलाल ने बीएलओ को कथित तौर पर "सरकारी कुतिया" कहकर अपमानित किया और उन्हें गन्दी-गन्दी गालियां दीं। काम न करने की धमकी: गाली-गलौज और विरोध करने पर बीएलओ को यह भी धमकी दी गई कि वह अब प्रधान के मनमाने ढंग से काम करेंगी।
मानसिक प्रताड़ना और रिकॉर्डिंग का दावा
पीड़ित बीएलओ सिया दुलारी ने शिकायत में स्पष्ट किया है कि प्रधान और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए इस दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और कार्य में लगातार बाधा से उन्हें मानसिक रूप से गहरा आघात पहुँचा है। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि उनके पास इस पूरी घटना की रिकॉर्डिंग (रिकॉर्डेड प्रमाण) मौजूद है, जो आरोपों की सत्यता सिद्ध करती है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और कानूनी मांग
बीएलओ सिया दुलारी ने उपजिलाधिकारी महोदय से निवेदन किया है कि ग्राम प्रधान रामशंकर (कार्य में बाधा डालने के लिए) और ऊषा पत्नी बाबूलाल (गाली-गलौज के लिए) के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिकायत पत्र दिनांक 26 नवंबर 2025 को प्रस्तुत किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने संज्ञान लिया है और सरकारी कार्य में बाधा डालने तथा महिला कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप में जल्द ही जांच के आदेश जारी किए जा सकते हैं, जिसके बाद एफआईआर दर्ज होने की संभावना है। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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