मकानों को ध्वस्त करना तो दूर पोखर पर हो रहे कब्जों को हटाने से क्यों हिचकिचा रहे अधिकारी

कालीदह पोखर पर दंडनीय अपराध का बोर्ड लगाकर भूला नगर निगम

मकानों को ध्वस्त करना तो दूर पोखर पर हो रहे कब्जों को हटाने से क्यों हिचकिचा रहे अधिकारी

भूमाफिया वेदप्रकाश गुप्ता ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी का भराव कर पोखर की जमीन पर की प्लाटिंग शुरू

स्वतंत्र प्रभात
सत्यवीर सिंह यादव
अलीगढ़,। जिले की पोखरों का धार्मिक स्थलों से कोई न कोई जुड़ाव रहा। यहां की अधिकांश पोखर और तालाब धार्मिक स्थलों से जुड़े रहे हैं। इसी तरह की स्थिति करीब 250 साल पुरानी महेंद्र नगर की कालीदह पोखर की है। यहां पर काली मंदिर से लगी 250 बीघा जमीन पर पोखर बनाई गई थी। पहले यह पोखर शहर से दूर थी लेकिन जैसे - जैसे आबादी बढ़ी वैसे - वैसे लोगों ने पोखर पर कब्जे करके मकान बनाने शुरू कर दिए।

यह सिलसिला करीब 50 साल से चला आ रहा है। अब तो भूमाफिया वेदप्रकाश गुप्ता ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी का भराव कर इस पोखर की जमीन पर प्लाटिंग शुरू कर दी है। जिसकी वजह से यह पोखर मात्र पांच बीघा तक ही सिमट कर रह गई है। इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि इस पोखर पर महेंद्र नगर के नाम से पूरा क्षेत्र बस गया है।


इस पोखर के संरक्षण के लिए शहर के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट तक पहल की। तब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिए कि अवैध कब्जे करने वालों के खिलाफ दंडनीय कार्रवाई की जाए। नगर निगम के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का महज इतना पालन किया है कि वहां पर एक बोर्ड लगा दिया है। जिसमें यह लिख दिया है कि इस पोखर की जमीन पर कब्जा न करें, अवैध कब्जा करना दंडनीय अपराध है।

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हालत यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नगर निगम के अधिकारी पोखर की इस जमीन से अवैध कब्जे नहीं हटा पा रहे हैं। पूर्व में बने मकानों को ध्वस्त करना तो दूर इन दिनों हो रहे कब्जों को भी हटाने से हिचकिचा रहे हैं। शहर के जागरूक नागरिकों ने इस पोखर से कब्जे हटाने के बारे में नगर निगम को कई बार लिखित और मौखिक तौर पर कहा लेकिन सुनवाई नहीं हुई।


स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध कब्जों के खिलाफ पूरे प्रदेश भर में अभियान चल रहा है, लेकिन कालीदह पोखर पर लगातार कब्जे हो रहे हैं। इस और प्रशासनिक अधिकारियों का बिल्कुल भी ध्यान नहीं है। यहां भी अतिक्रमण के खिलाफ योगी जी का बुलडोजर चलना चाहिए। लोगों ने बताया कि पोखर पर अवैध कब्जों का सिलसिला जारी है। 250 बीघा की पोखर सिकुड़कर अब पांच बीघा तक सिमट गई है ।

शिकायतों के बाद भी अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। केवल नगर निगम ने कब्जे करना दंडनीय अपराध का बोर्ड लगाकर अपने कर्तव्यों को पूरा कर लिया है।कालीदह पोखर पर पिछले कई सालों से लगातार अवैध कब्जे हो रहे हैं। कई बार शिकायत भी की गई है, लेकिन कुछ समय बाद फिर से अतिक्रमण होना शुरू हो जाता है। इस ओर अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।

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