स्वच्छ भारत अभियान महात्मा गांधी का सपना

स्वच्छ भारत अभियान महात्मा गांधी का सपना

हितेन्द्र शर्मा

भारत सरकार द्वारा 2 अक्टूबर 2014 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर "स्वच्छ भारत अभियान" का शुभारंभ किया गया था।

राष्ट्रीय स्तर के इस अभियान का सीधा सम्बन्ध हमारे स्वास्थ्य, वातावरण और भविष्य से है। यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का स्वप्न था जिसे पूरा करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बापू की 150वीं जयंती के शुभ अवसर 2 अक्टूबर 2019 तक राष्ट्रीय स्तरीय "स्वच्छ भारत अभियान" के लक्ष्य प्राप्ति की कल्पना की है।

वर्ष भर बापू की 150वीं जन्मशती मनाये जाने सहित भारत सरकार ने महात्मा गांधी के संदेश का प्रसार करने का भी फैसला किया है। गांधी जी का स्वपन था कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें।

इस कार्यक्रम का लक्ष्य आस-पास की सफाई कर कचरा मुक्त वातावरण बनाना, शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराना, पेड़-पौधे लगाकर एक स्वच्छ भारत का निर्माण करना है। 

यह अभियान देश के नागरिकों को स्वच्छता संबंधी आदतें अपनाने व स्वच्छता के लिए तत्परता से काम करने का भी संदेश देता है। स्वच्छ भारत अभियान की कल्पना को साकार करने हेतु देश के सभी प्रतिष्ठित व अग्रणी नागरिक, संस्थाएं भी भारत सरकार के साथ निरंतर सहयोग कर लगभग पाँच वर्षों से हमें प्रेरित कर रहे है।

लेकिन विडंबना कि हम भी अनुसरण करते हुए सिर्फ सांकेतिक सफाई कर रहे हैं।सकारात्मकता अपनाने हेतु पहले हर स्तर पर सोच परिवर्तित करने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी, बच्चों सहित स्वयं को भी गन्दगी न करने बारे शिक्षित करना होगा वर्तमान समय हमारी विकृत सोच का बलिदान मांग रहा है, स्वयं बदले, सोच बदले, गंदगी फैलाने वालों को संरक्षण देने की जगह स्वच्छता हेतु प्रेरित करे।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्वच्छता के विभिन्न कार्यो के साथ- साथ, आमजन की सोच और स्वच्छता के प्रति जागरुकता लाना भी मुख्य लक्ष्य है। हम बदलेंगे, युग बदलेगा, हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा जैसी व्यवहारिक बाते जीवन में लानी होगी, अभी भी समय है कि हम ठान ले कि न तो अपने आस-पास गंदगी करेंगे और न ही किसी को करने देंगे।

क्योंकि हमारे आस-पास के क्षेत्र में साफ-सफाई न होने के कारण हम अनगिनत बीमारियों के शिकार हो रहे है। कल्पना करें यदि स्वच्छ भारत अभियान सामूहिक सहयोग से सफल होता है तो जन स्वास्थ्य पर भी अनुकूल असर होगा और बिमारी पर खर्च होने वाली हमारी कमाई की बचत भी होगी ।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने कहा था कि राजनीतिक स्वतंत्रता से ज्यादा जरूरी स्वच्छता है और स्वच्छता को अपने आचरण में इस तरह अपना लो कि वह आपकी आदत बन जाए। आशावादी हूँ, धीरे-धीरे ही सही लेकिन बापू का स्वप्न "स्वच्छ भारत" अवश्य साकार होगा और हम सभी नागरिकों को इस स्वच्छ क्रांति के लिए इतिहास में याद रखा जाएगा।

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