होर्मुज पर ईरान की हुकूमत: दुनिया की नब्ज पर हाथ

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है। युद्ध के बाद पहली बार यहां से 35 पोत पास हुए जिसमें 11 पोत भारत आ रहे हैं।

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फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है। युद्ध के बाद पहली बार यहां से 35 पोत पास हुए जिसमें 11 पोत भारत आ रहे हैं। इनमें कच्चा तेलएलपीजीउर्वरक व अन्य सामान है। लेकिन ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज पर उसकी हुकूमत चलती रहेगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे छोटा लेकिन सबसे खतरनाक गलियारा है। चौड़ाई सिर्फ 33 किलोमीटरलेकिन इसी से होकर हर दिन दुनिया के 20% तेल और 30% LNG गुजरती है। मार्च 2026 में ईरान ने इस गलियारे को बंद कर दिया। 700 टैंकर फंस गएतेल 80 डॉलर पार कर गया। ये सिर्फ युद्ध की घोषणा नहीं थी। ये ईरान का ये कहना था कि "दुनिया की ऊर्जा की नब्ज मेरे हाथ में है"। होर्मुज क्या है और ईरान इसे क्यों चाहता हैहोर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, UAE, कुवैतकतरइराक का पूरा तेल इसी रास्ते से जाता है। ईरान का दक्षिणी तट इस जलडमरूमध्य के उत्तर में है। भूगोल ने ईरान को स्ट्रेटेजिक लीवरेज दिया है। फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के जरिए - पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी बना दी। अब नियम ये है: होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज को 40 सवालों का घोषणा पत्र जमा करना होगा। माल क्या हैमालिक कौन हैक्रू की नेशनलिटी क्या है। जो नहीं मानेगाउस पर मिसाइलड्रोन हमला या कब्जे का खतरा है। मार्च 2026: जब ईरान ने नल बंद कर दिया- 3 मार्च 2026 को ईरान ने आधिकारिक रूप से होर्मुज बंद करने का ऐलान कर दिया। बंद होते ही

सामान्य तेल यातायात में 86% गिरावट आई

एक मार्च को 19.8 मिलियन बैरल/दिन की जगह सिर्फ 2.8 मिलियन बैरल गुजरे। 706 गैर-ईरानी टैंकर कतार में फंस गए। ब्रेंट क्रूड 10% उछलकर 80 डॉलर पर पहुंच गया। ईरान ने कहा कि ये बंद सिर्फ अमेरिकाइजरायल और यूरोपीय जहाजों के लिए है। चीन के झंडे वाले जहाजों को छूट दी गई।

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क्या ईरान कानूनी तौर पर ऐसा कर सकता है?

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इसका छोटा सा जवाब है नहीं। UNCLOS यानी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि की धारा 37-44 के तहत होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में सभी देशों को "ट्रांजिट पैसेज" का अधिकार है। न ईरान और न ओमान एकतरफा तरीके से इसे बंद कर सकते हैं। समुद्री कानून विशेषज्ञ रेड्जा जकारिया कहते हैं कि ईरान आत्मरक्षा का हवाला दे सकता हैलेकिन अगर वो नेविगेशन रोकता है तो ये UNCLOS का उल्लंघन होगा। लेकिन असलियत में ईरान सैन्य शक्ति और भौगोलिक स्थिति से यातायात को प्रभावित कर रहा है। ये कानूनी संप्रभुता नहींलेकिन "डिफैक्टो कंट्रोल" है। ईरान ने अब "टोल-पास" सिस्टम शुरू कर दिया है। जहाजों को PGSA से पास लेना होगा। रिपोर्ट्स कहती हैं कि सुरक्षित गुजरने के लिए जहाजों से 20 लाख डॉलर तक मांगे जा रहे हैं। ईरान ने इनकार किया हैलेकिन अमेरिका ने जहाजों को चेतावनी दी है कि टोल न देंक्योंकि इससे IRGC को फंड मिलेगा। दुनिया पर असर-

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तेल और गैस: भारत अपनी जरूरत का 90% तेल आयात करता है। 2025 में 160 अरब डॉलर का तेल आयात हुआ था। होर्मुज बंद होने से भारत सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। यूरोप: कतर ने LNG उत्पादन रोका तो यूरोपीय गैस कीमतें 40% बढ़ गईं। LNG टैंकर का किराया 2 लाख डॉलर/दिन से ऊपर चला गया। अफ्रीका- UN महासचिव गुटेरेश ने चेताया कि अफ्रीका के तेल और उर्वरक आयात का 13% होर्मुज से आता है। बंद रहा तो महंगाई और खाद्य संकट बढ़ेगा। लेबनान में सीजफायर के बाद ईरान ने 10 दिन के लिए होर्मुज खोल दिया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ये सिर्फ सीजफायर की अवधि के लिए है। भारत के लिए क्या मायने हैं- भारत के लिए होर्मुज "लाइफलाइन" है।

विकल्प सीमित हैं: केप ऑफ गुड होप से रास्ता 15 दिन लंबा और 20% महंगा पड़ता है। रणनीति: चाबहार पोर्टईरान के साथ डिप्लोमेसीऔर रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाना। लेकिन ये सब शॉर्ट टर्म सॉल्यूशन हैं। अगर होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल स्थायी हो गया तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा हर महीने में दांव पर लगेगी। होर्मुज पर ईरान की हुकूमत कानून से नहींभूगोल और मिसाइल से चलती है। वो जानता है कि दुनिया तेल के बिना 10 दिन नहीं चल सकती। इसलिए वो कभी पूरी तरह बंद नहीं करेगा। वो सिर्फ "नल" को धीमा-तेज करेगा ताकि अमेरिका झुकेतेल महंगा होऔर उसकी बात मानी जाए। ये 21वीं सदी की नाकेबंदी है। बंदूक की जगह टोल-पासयुद्ध की जगह 40 सवालों का फॉर्म। और दांव पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था।

 

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