बभनान में विकास या घोटाला? जनता की लोहे की बेंच झाड़ियों में दबी, जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध

बस्ती जिले के नगर पंचायत बभनान में विकास कार्यों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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बस्ती। बस्ती जिले के नगर पंचायत बभनान में विकास कार्यों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पंचायत कार्यालय के पीछे झाड़ियों में लोहे की बेंच पड़ी मिली, जिसे देखकर लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
 
जानकारी के अनुसार, यह बेंच आम जनता की सुविधा के लिए खरीदी गई थी, ताकि इसे किसी सार्वजनिक स्थान—जैसे चौराहा, बाजार या सड़क किनारे—स्थापित किया जा सके। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही या मिलीभगत के चलते इसे झाड़ियों में डालकर छोड़ दिया गया।
 
मौके पर बेंच के आसपास उगी घनी झाड़ियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि यह लंबे समय से उपयोग में नहीं लाई गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस कार्य को कागजों में पूरा दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है?
 
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ कागजी खेल किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि संभवतः बेंच की खरीद और स्थापना दिखाकर बजट का उपयोग दिखा दिया गया, जबकि हकीकत में इसे जनता तक पहुंचाने की कोई कोशिश नहीं की गई। ऐसे में पूरे मामले में घोटाले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
 
मामले ने नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी (ईओ) की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के इस तरह की लापरवाही संभव नहीं है। यदि कार्य आवंटित हुआ था, तो उसकी निगरानी क्यों नहीं की गई?
 
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बेंच अगर सार्वजनिक स्थल पर लगाई जाती, तो राहगीरों, बुजुर्गों और गरीब लोगों को इसका लाभ मिलता। लेकिन इसे झाड़ियों में डालकर उनकी सुविधा को नजरअंदाज कर दिया गया, जो सीधे तौर पर जनता के अधिकारों का हनन है।
 
इस संबंध में जब नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो स्पष्ट जवाब नहीं मिला। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मामला संज्ञान में आने के बाद जांच कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
 
स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह के मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो विकास योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।
 
 

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