अधिवक्ता राजेश यादव मौत प्रकरण में बड़ा खुलासा, पूर्व पुलिस जांच पर उठे गंभीर सवाल

परिजनों ने किया तत्काल कार्रवाई की मांग, लोगों को जगी आस

राजेश तिवारी Picture
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सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश -

घोरावल थाना क्षेत्र निवासी अघिवक्ता राजेश यादव की संदिग्ध मौत के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। पुनः विवेचना में घटना को सड़क हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या बताए जाने के बाद तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

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घटना 8 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। मृतक पक्ष का आरोप है कि अधिवक्ता राजेश यादव की हत्या को योजनाबद्ध तरीके से दुर्घटना का रूप दिया गया। परिजनों के अनुसार थाना घोरावल में तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने काफी देर तक मामला दर्ज नहीं किया और बाद में भी जांच को हादसे की दिशा में मोड़ दिया गया।

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मृतक के भाई दिनेश कुमार यादव ने आरोप लगाया कि तत्कालीन एसएचओ आदि ने प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर मामले को एक्सीडेंट साबित करने का प्रयास किया।परिजनों का कहना है कि न्याय की उम्मीद में लगातार पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाने के बाद मामले की दोबारा जांच कराई गई।परिजनों के अनुसार वर्तमान घोरावल इंस्पेक्टर बृजेश सिंह द्वारा की गई विवेचना में पहले की जांच पर कई सवाल खड़े हुए हैं। जांच में तथ्य सामने आया कि घटना पूर्व नियोजित साजिश के तहत अंजाम दी गई थी।

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मृतक पक्ष ने मंगल पाल, निसार अहमद, चंद्रशेखर विश्वकर्मा, अशोक मांझी और राणा सर्वेंद्र राव अंबेडकर उर्फ रमेश पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। परिजनों के मुताबिक मंगल पाल और अशोक मांझी पर पुलिस अधीक्षक द्वारा 25-25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया जा चुका है।

परिजनों का यह भी आरोप है कि वास्तविक आरोपियों को बचाने के लिए अभय पाल को मोहरा बनाकर जेल भेजा गया, जबकि मुख्य आरोपी खुलेआम घूमते रहे।

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अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पुनः विवेचना में यह स्पष्ट हो चुका है कि मामला दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या का है, तो क्या पुलिस फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई करेगी, या फिर यह मामला भी जांच और आरोपों के बीच उलझा रह जाएगा। जिसके क्रम में परिजनों ने पुलिस अधीक्षक का ध्यान आकृष्ट कराते हुए तत्काल गिरफ्तार करने की मांग किया है।

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