मांगे पूरी होने तक एचएमकेपी जारी रखेगी मजदूर किसानों के अधिकारों की लड़ाई .राष्ट्रीय अध्यक्ष
हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के मनाए गए मई दिवस को निरर्थक बताते हुए कहा है कि जब तक श्रमिकों और मजदूरों के हितों से संबंधित सारी मांगे पूरी ना हो जाएं। उनके हित होने की शुरुआत ना हो जाए।
कानपुर। हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के मनाए गए मई दिवस को निरर्थक बताते हुए कहा है कि जब तक श्रमिकों और मजदूरों के हितों से संबंधित सारी मांगे पूरी ना हो जाएं। उनके हित होने की शुरुआत ना हो जाए। तब तक मई दिवस के स्थान पर हर साल काला दिवस ही मनाया जाना चाहिए। अवगत कराते चलें कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के बीते मई दिवस को भी काला दिवस के रूप में मनाने की अपील सभी ट्रेड यूनियनों से की थी।
इस बीच श्रमिकों, मजदूरों और कर्मचारियों के हित में लगातार संघर्ष कर रहे हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने व्यक्तव्य जारी करते हुए कहा है कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल कलप्पा ने कहा है कि मई दिवस शुरुआत 1886 में शिकागो में श्रमिक द्वारा 08 घण्टे के कार्य दिवस की मांग को लेकर एतिहासिक संघर्ष से हुई थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा के मुताबिक एकता, प्रतिरोध और श्रमिकों द्वारा बड़ी मुश्किल से हासिल किये गये अधिकारों का प्रतीक है।
हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल. कलप्पा के माध्यम से राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने मई श्रम संघिताओं के तहत श्रमिको के विधानिक अधिकारों का हनन। बढ़ती नौकरी की असुरक्षा ठेका आधारित रोजगार व बेरोजगारी। सामुहिक सौदेबाजी और ट्रेडयूनियन आजादी पर हमला। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमो का निजीकरण व विनिवेश। श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी और कारपेंर्पोरेट समर्थक नीतिगत दिशाएं जैसे मुद्दों की भी चर्चा करते हुए हिन्द मजदूर किसान पंचायत की ओर से कड़ा विरोध भी दर्ज कराया।
श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने के अपने संकल्प को तुरन्त दोहराये। राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष एल. कलप्पा ने सभी केन्द्रीय संगठनों व लोक तात्रिक ताकतों से इस मई दिवस को काला दिवस के रूप में मनाने का आवाहन इसीलिए किया था क्योंकि मई दिवस केवल एक उत्सव नहीं है बल्कि न्याय के लिए संघर्ष जारी रखने का दृढ संकल्प का भी दिन है। हिंद मजदूर किसान पंचायत का जिसके खिलाफ संघर्ष तब तक जारी रहेगा ,जब तक मजदूर श्रमिकों और कर्मचारियों के हितों से जुड़ी सभी मांगे पूर्ण रूप से मानते हुए उन्हें अमलीजामा नहीं पहना दिया जाएगा।
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