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सोनभद्र में हर घर जल मिशन का दम घोंट रहे अधिकारी, प्यासे आदिवासी और बेजुबान पशुओं की कौन सुनेगा पुकार
विश्व हिंदू महासंघ की हुंकार सड़क से संसद तक लड़ेंगे, आदिवासियों की प्यास पर जिला अध्यक्ष चंदन सोनी का तीखा प्रहार
ब्यूरो रिपोर्ट
चोपन / सोनभद्र -
प्रदेश सरकार की अति-महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना सोनभद्र के विकास खण्ड चोपन अंतर्गत ग्राम सभा कोटा में विभागीय लापरवाही और कार्यदायी संस्थाओं की उदासीनता की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। 56 टोलों वाली इस विशाल ग्राम सभा में पाइपलाइन और नलों का जाल तो बिछ चुका है, लेकिन धरातल पर आदिवासियों की प्यास बुझाने में सिस्टम पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।

इस जल संकट का सबसे विचलित करने वाला पहलू यह है कि 25.11.2020 से संचालित गुरमुरा ग्राम समूह पेयजल योजना, जिसकी स्वीकृत लागत 1600580 लाख में है, आज महज एक प्रदर्शनी की वस्तु बनकर रह गई है। L&T कंस्ट्रक्शन लिमिटेड, नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के समन्वय से बनी यह योजना कुप्रबंधन का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी धन का बंदरबांट तो हुआ, लेकिन प्यासे कंठों तक पानी नहीं पहुँचा।
योजना की विफलता का एक मुख्य कारण कर्मचारियों का शोषण भी है। जानकारी के अनुसार पानी की टंकी पर तैनात ऑपरेटर प्रदीप को लंबे समय से वेतन नहीं मिला है। ग्राम सभा के पतगडी टोला समेत अन्य इलाकों में स्थिति भयावह है। यहाँ हफ्ते में बमुश्किल एक बार मात्र एक घंटे के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है, बाकी 10 से 12 दिनों तक नल सूखे पड़े रहते हैं। ग्राम सभा सदस्य भगवत सिंह गौड़ ने मार्मिक पक्ष रखते हुए बताया इंसान तो जैसे-तैसे जी रहे हैं, लेकिन पानी के अभाव में बेजुबान जानवर और पशु-पक्षी भी दम तोड़ रहे हैं।
अभी तो गर्मी की केवल शुरुआत है, जब प्रचंड गर्मी आएगी तो स्थिति कितनी भयावह होगी, इसकी कल्पना मात्र से डर लगता है। विश्व हिंदू महासंघ (प्रिंट मीडिया) के सोनभद्र जिला अध्यक्ष चंदन सोनी ने आदिवासियों की आवाज उठाते हुए शासन-प्रशासन पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा लाखों-करोड़ों की लागत से बनी टंकियां आज महज शोपीस हैं। कुछ लापरवाह अधिकारी सरकार की मंशा को धूमिल कर रहे हैं। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो यह मामला सड़क से लेकर संसद तक उठाया जाएगा।
अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह न चुराएं।स्थानीय निवासी लक्ष्मण प्रसाद, राम अवतार गौड़ और सुमन सिंह गौड़ ने शासन से तीखा सवाल पूछा है कि क्या सरकार की नजर में इंसान को पानी की जरूरत हफ्ते में सिर्फ एक दिन होती है? वहीं ग्राम प्रधान प्रहलाद चेरो ने भी प्रशासन से तत्काल कड़ा एक्शन लेने और ऑपरेटर के वेतन की समस्या हल कर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
कोटा ग्राम सभा की यह समस्या केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि सोनभद्र के कई अन्य क्षेत्रों में भी हर घर जल योजना का यही हाल हो सकता है। ग्रामीणों और हिंदू महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो जिला मुख्यालय का घेराव किया जाएगा। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागते हैं या जनता को इस प्रचंड गर्मी में भी फाइलों के भरोसे प्यासा छोड़ दिया जाएगा।

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