15 की उम्र में डकैतों ने किया था अपहरण, 65 साल बाद 80 की उम्र में मायके लौटीं मिठनी

साल 1961-62 में बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के टोलवा आट गांव में डकैती के दौरान 15 वर्षीय मिठनी का अपहरण कर लिया गया था।

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हरदोई

हरदोई जिले से एक भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है। करीब 65 साल पहले डकैतों द्वारा अगवा की गई मिठनी देवी आखिरकार 80 वर्ष की उम्र में अपने मायके लौट आईं। यह कहानी संघर्ष, यादों और अपनों से दोबारा मिलने की मिसाल बन गई है।

साल 1961-62 में बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के टोलवा आट गांव में डकैती के दौरान 15 वर्षीय मिठनी का अपहरण कर लिया गया था। उस समय उसकी शादी हो चुकी थी और गौना होना बाकी था। डकैतों ने घर में लूटपाट के साथ उसके पिता और भाई पर हमला किया और मिठनी को अपने साथ ले गए।

कुछ समय बाद डकैतों से छुड़ाकर अलीगढ़ निवासी पहलवान सोहनलाल यादव ने उसे मुक्त कराया और बाद में दोनों ने विवाह कर लिया। दंपती के आठ बच्चे हुए। मिठनी ने अपना जीवन अलीगढ़ में बिताया, लेकिन वह हमेशा अपने मायके को याद करती रहीं।

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वह अपने बच्चों को अक्सर अपने अपहरण और गांव की कहानी सुनाया करती थीं। सबसे छोटी बेटी सीमा यादव ने मां की इच्छा को समझते हुए उन्हें मायके ले जाने का निश्चय किया। शुक्रवार को सीमा अपनी मां को लेकर अलीगढ़ से हरदोई पहुंचीं।

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स्टेशन से सकाहा स्थित शिव मंदिर पहुंचने के बाद मिठनी की यादें ताजा हो गईं। गांव वालों से पूछताछ के बाद वह अपने भाई शिवलाल के घर पहुंचीं। परिजनों ने भावुक माहौल में उनका स्वागत किया। खबर फैलते ही रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।

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भाई और अन्य परिजनों की मृत्यु की जानकारी मिलने पर मिठनी भावुक हो गईं, लेकिन अपनों से मिलने का सुकून उनके चेहरे पर साफ नजर आया। मायके में कुछ समय बिताने के बाद वह बेटी के साथ वापस अपने घर लौट गईं।

बेटी सीमा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि वह अपनी मां की आखिरी इच्छा पूरी कर सकीं। मिठनी की यह कहानी आज भी रिश्तों, यादों और उम्मीद की ताकत को दर्शाती है।

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