11 ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर लौटे सेवानिवृत्ति शिक्षक ने साझा किया सफर का विचार 

धरा पर कहीं स्वर्ग है तो यही है ऐसी देव भूमि के दर्शन कर मां को शांति प्राप्त हुई यह सनातन की परंपरा है 

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बरेली/नवाबगंज विकासखंड के गांव सबलखेड़ा के सेवानिवृत शिक्षक हर प्रसाद गंगवार 32 दिन के भ्रमण पर उन्होंने 11 है जो तेरे लिंग के दर्शन किए और वहां के वातावरण एवं वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर स्वतंत्र प्रभात से वार्ता करते हुए अपने यात्रा के दौरान मिले सुख दुख को साझा किया और बताया जगन्नाथ पुरी एक धाम है जिसे लोग कहते हैं जगन्नाथ के भात को जग पसारे हाथ बिना किस्मत के मिलता नहीं जगन्नाथ का भात उन्होंने बताया मनुष्य को अपनी पूर्ण कमाई में से कुछ शेर इकट्ठा करके धार्मिक स्थलों का भ्रमण करना चाहिए जहां जाने पर मनुष्य को शांति प्रदान तो होती ही है परंतु भौगोलिक इतिहास का विज्ञान होता है जिसके तहत उन्होंने 32 दिन के भ्रमण के दौरान 11 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए।
 
 उनको लगा धरती पर यदि कहीं स्वर्ग है तो इन्हीं स्थानों पर है जिन्हें देखने के लिए लोग लाखों की संख्या में एकत्रित होते हैं दर्शन को जिसके तहत वह प्रयागराज से चलकर चित्रकूट बाबा विश्वनाथ चुनार में मछला का किला गया बोधगया कोलकाता में मां काली का मंदिर पश्चिम बंगाल में ही नाम खाना गंगासागर कपिल मुनि आश्रम कोणार्क जगन्नाथ पुरी धाम तिर्यंक राज बाबा बैजनाथ बासुकीनाथ मल्लिकार्जुन तिरुपति बालाजी कांची पुरी सिडनी सेतु बंधु रामेश्वरम कन्याकुमारी में महर्षि विवेकानंद आश्रम मदुरई सोमनाथ मंदिर भीमाशंकर पातालगंगा शनिदेव घृकेश्वर उज्जैन महाकाल ओकरा ओंकारेश्वर समेत विभिन्न स्थानों पर भ्रमण कर उन्होंने ज्ञान है जो तेरे लिंगों के दर्शन कर अपने को धन्य समझा।
 
 और उन्होंने भोलेनाथ का अपार आशीर्वाद मानते हुए यह यात्रा पूर्ण की उन्होंने अंत में कहा यदि धरा पर कहीं स्वर्ग है तो इन्हीं स्थानों पर है प्रत्येक व्यक्ति को अपनी कमाई से कुछ धनराशि बचाकर इन स्थानों का भ्रमण करना चाहिए जीवन में प्राणी ना कुछ लेकर आया ना कुछ लेकर जाएगा इन धार्मिक स्थलों के भ्रमण करने से मनुष्य को शांति प्रदान होती है और भौगोलिक इतिहास का भी ज्ञान होता है उन्होंने बस के द्वारा अपने 32 दिन के भ्रमण का अनुभव साझा किया और बताया हर जगह उनका बढ़िया सुविधा मिली परंतु बैजनाथ में कष्ट दायक यात्रा रही वहां के पंडा पुजारी का आतंक ठीक नहीं था वहां के प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए बाकी यात्रा सफल रही।
 
 

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