असम के उत्तर करीमगंज में अल्पसंख्यक मतदाताओं के मजबूत जनसमर्थन के साथ महिला उम्मीदवार के रूप में मुन्नी छेत्री आगे बढ़ रही हैं

विपक्षी दल नहीं चाहता कि मुननी छेत्री उत्तर करिमगंज में बीजेपी पार्टी का टिकट पाए

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श्रीभूमि- उल्लेखनीय है कि 2026 के चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, पूरा राज्य के साथ तालमेल बनाते हुए बराक घाटी में भी राजनीतिक उत्साह बढ़ रहा है। विपक्षी दल के साथ-साथ शासक दल के नेताओं की ओर से भी विभिन्न जगहों पर जनसंपर्क जारी है। राज्य के मुख्यमंत्री के एक के बाद एक कठोर भाषणों में, अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाताओं की अधिकता वाले केंद्रों में शासक दल के नामचीन नेता संकट में हैं।
 
जिसमें उत्तर करिमगंज सीट को लेकर भी शासक और विपक्षी दल के नेताओं में काफी हलचल है। एक ओर विपक्षी दल कांग्रेस/AIUDF में पिछले दिनों वोट देकर पीड़ित जनता नए चेहरे की तलाश कर रही है, ठीक दूसरी ओर शासक दल के स्थानीय नेताओं की उदासीनता से जर्जर अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाता भी चाहते हैं कि शासक दल से ऐसा भरोसेमंद व्यक्तित्व आये जो युवा पीढ़ी से हो और जिसमें दोनों प्रकार की क्षमताएं हों।
 
समुदाय के प्रति स्वीकार्यता और जिम्मेदारी हों। इस मामले में स्थानीय नेताओं को काफी गति प्राप्त करनी पड़ रही है। क्योंकि कई ऐसे लोग हैं पुराने व्यक्तित्व जिनकी मानसिकता और काम में युवाओं की सक्रियता का प्रभाव नहीं है, वहीं कई ऐसे हैं जो उम्र में युवा और नए चेहरा हैं लेकिन समुदाय के दोनों पक्षों के मतदाताओं में स्वीकार्यता नहीं रखते। फिर कई ऐसे हैं कि पहले विभिन्न राजनीतिक जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल में कार्य करने पर जनता संतुष्ट नहीं थी, इसलिए उन्हें दूसरा या तीसरा अवसर देने के लिए मतदाता नाराज हैं।
 
लेकिन इन सभी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच लंबे समय से समाज सेवा में लगे समाजसेवी मुन्नी चेत्री को एक महिला टिकट प्रत्याशी के रूप में संभावनाशील माना जा रहा है और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों में से यह नाम चुनावी परिदृश्य में उभर रहा है। पूरे बराक घाटी में समाजसेवी मुन्नी चेत्री अब तक राजनीतिक क्षेत्र में आम जनता की पहली पसंद के रूप में हैं, जिन्हें भाजपा पार्टी या निर्दलीय रूप में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग भारी मत देने के लिए उत्साहित होते देख रहे हैं।
 
यहां तक कि मुन्नी चेत्री के जनसमर्थन में पार्टी के नीतिगत निर्देशों की अनदेखी भी कर कई कांग्रेस के मतदाताओं ने भी खुलकर कहा कि अगर मुन्नी छेत्री को बीजेपी का टिकट मिलता है तो हमें बीजेपी को भी वोट देना पड़ेगा ताकि मुन्नी छेत्री के आदर्श और समाज सेवा के प्रति उनकी जिम्मेदारी का सम्मान किया जा सके। दूसरी ओर, विशेष सूत्रों की खबर है कि विपक्षी दल भी नहीं चाहता कि दोनों समुदायों में स्वीकृति रखने वाले समाज कार्यकर्ता मुन्नी छेत्री को बीजेपी से टिकट मिले।
 
क्योंकि लंबे समय से की जा रही समाज सेवा के माध्यम से उन्हें अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय में विशेष स्वीकृति और प्रभाव प्राप्त है। अब देखने वाली बात है कि उत्तर करीमगंज से हाईकमान किस पर मेहरबान होता है और टिकट किसे मिलता है।

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