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भागवत साक्षात श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप, श्रवण से होता है आत्मिक कल्याण -व्यास महेश देव पांडेय
श्रीमद्भागवत साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरूप है। जो जीव इसकी शरण में आता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और उसे परम मोक्ष की प्राप्ति होती है- माधवाचार्य पंडित महेश देव पाण्डेय
अजित सिंह ( ब्यूरो) के साथ कु. रीता की रिपोर्ट
श्री राम नगर स्थित ॐ श्री सदाशिव महादेव मंदिर के प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य एवं भक्तिमय शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन व्यासपीठ पर विराजमान व्यास माधवाचार्य पंडित महेश देव पांडेय ने विधि-विधान से पूजन के पश्चात कथा की अमृत वर्षा की। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य यजमान पंडित प्रमोद चौबे ने सपरिवार श्रीमद्भागवत पोथी एवं व्यासपीठ का विधिवत पूजन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के प्रथम सोपान में व्यास जी ने भागवत महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए देवर्षि नारद और भक्ति देवी के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब भक्ति के पुत्र ज्ञान और वैराग्य कलयुग के प्रभाव से वृद्ध व अचेत हो गए थे, तब सनकादि ऋषियों ने नारद जी को श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन का मार्ग सुझाया। हरिद्वार के आनंद तट पर कथा श्रवण मात्र से ज्ञान और वैराग्य पुन युवा हो गए।
व्यास जी ने कहा श्रीमद्भागवत साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरूप है। जो जीव इसकी शरण में आता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और उसे परम मोक्ष की प्राप्ति होती है। पंडित महेश देव पांडेय ने गोकर्ण और धुंधकारी के प्रसंग के माध्यम से समझाया कि कुमार्गी व्यक्ति भी यदि पूर्ण श्रद्धा के साथ भागवत श्रवण करे, तो उसकी सद्गति निश्चित है।
उन्होंने ओबरावासियों से आह्वान किया कि कलयुग में भगवान की कथा ही एकमात्र सहारा है, जो मनुष्य को तनाव और अशांति से मुक्ति दिलाकर सत्कर्मों की ओर प्रेरित करती है। कथा के दौरान मधुर भजनों की धुन पर मुख्य यजमान सहित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। पूरे श्री राम नगर का वातावरण राधे-राधे के जयकारों से गुंजायमान रहा। प्रथम दिन की आरती के पश्चात भारी संख्या में उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के तमाम गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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