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ट्रेन लेट होने से छूटी परीक्षा उपभोक्ता फोरम का बड़ा फैसला, रेलवे भरेगा ₹9.10 लाख का हर्जाना
कोर्ट में 20 लाख का दावा और ऐतिहासिक फैसला रेलवे के लिए बड़ा सबक
बस्ती। बस्ती जिले में उपभोक्ता फोरम द्वारा ऐतिहासिक फैसला लिया गया जिसमें एक छात्र की परीक्षा छूटने कोर्ट द् द्वारा रेलवे को विभाग को लगाया जुर्मानाबस्ती के पिकौरा बक्स मोहल्ले की रहने वाली समृद्धि BSc बायोटेक की छात्रा हैं। उन्होंने लखनऊ के जयनारायण पीजी कॉलेज में अपनी परीक्षा देने के लिए इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट बुक किया था। अक्सर अपनी देरी के लिए चर्चा में रहने वाले रेलवे विभाग को अब एक छात्रा के भविष्य से खिलवाड़ करना महंगा पड़ गया है। बस्ती जिले की समृद्धि ने ट्रेनों की लेटलतीफी को किस्मत मानकर बैठने के बजाय कानूनी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की।
क्या है पूरा मामला?
बस्ती के पिकौरा बक्स मोहल्ले की रहने वाली समृद्धि BSc बायोटेक की छात्रा हैं। उन्होंने लखनऊ के जयनारायण पीजी कॉलेज में अपनी परीक्षा देने के लिए इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट बुक किया था।
शेड्यूल: ट्रेन को सुबह 11:00 बजे लखनऊ पहुंचना था।
परीक्षा का समय: समृद्धि को हर हाल में 12:30 बजे सेंटर पहुंचना था।
हकीकत: सुपरफास्ट होने के बावजूद ट्रेन ढाई घंटे की देरी से लखनऊ पहुंची, जिसके कारण छात्रा परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सकी और उसकी साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया।
कोर्ट में 20 लाख का दावा और ऐतिहासिक फैसला
परीक्षा छूटने से आहत छात्रा ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील ने रेलवे की सेवा में कमी बताते हुए 20 लाख रुपये के मुआवजे का दावा पेश किया। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे की दलीलों को खारिज कर दिया और निम्नलिखित आदेश दिए:
हर्जाना: रेलवे को छात्रा को कुल 9 लाख 10 हजार रुपये का हर्जाना देना होगा।
जुर्माना: यदि भुगतान में देरी होती है, तो रेलवे को इस राशि पर 12 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा।
रेलवे के लिए बड़ा सबक Basti यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए एक नजीर है जो ट्रेनों की देरी के कारण अपना आर्थिक या व्यक्तिगत नुकसान झेलते हैं। उपभोक्ता फोरम ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘सुपरफास्ट’ के नाम पर टिकट बेचने के बाद रेलवे समय की पाबंदी से अपनी जिम्मेदारी नहीं मोड़ सकता।

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