भ्रष्टाचार के आगे दबे एसडीओ और इंजीनियर ने साधी चुप्पी

नाली निर्माण कार्य में लोकल  सरिया और घटिया क्वालिटी का  सृमेंट हो रहा इस्तेमाल

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शहडोलसे दिनेश चौधरी की रिपोर्ट 
 
जिले के करकटी पंचायत में नाली निर्माण कार्य हो रहा हैं जिसकी कीमत 3 लाख 79 हजार रुपये हैं जिसकी कुल लंबाई 120 मीटर के आसपास बताई गई हैं। जिसमें भारी भ्रष्टाचार किया गया हैं। ग्रामीणों का आरोप हैं कि नाली निर्माण के दौरान कम सरिया सहित अन्य मटेरियल का यूज किया गया हैं जिसमे नाली का गिरना लगभग तय ही माना जा रहा हैं। 
 
नाली निर्माण कार्य मे भारी भ्रष्टाचार का हिस्सा बना हुआ हैं। आपको बता दें कि इस निर्माण कार्य में जो नाली निर्माण कार्य एस्टीमेट में दिखाया गया है उस प्रकार से नाली का निर्माण न करवाकर अपने मनमाने तरीके से करवाया जा रहा है, जिससे कि कम लागत में नाली का निर्माण किया जा सके और मैच कुछ ही महीना में नाली ढह  जाने की स्थिति भी बनी रहेगी।  जिससे यह साफ वक्त कहता है कि जिले में बैठे अधिकारी और निर्माण कार्य करवा रहे ग्राम पंचायत की  संयुक्त मिली भगत से इस भ्रष्टाचार को एक अंजाम तक पहुँचाने की प्रयन्त किया जा रहा हैं। 
 
अधिकारियों की साठ गाठ से पंचायत सचिव सरपंच की बल्ले बल्ले
ग्राम पंचायत में हो रहे इस निर्माण कार्य की बात करें तो  चाहे नाली निर्माण कार्य य बाउंड्रीवाल य स्टॉपडेम निर्माण कार्य मे सचिव को कुछ जानकारी ही नहीं रहता  आपको बता दे कि नाली  सहित बाउंड्रीवाल  की निर्माण कार्य मे भारी भ्रष्टाचार हो रहा हैं लेकिन लाख विरोध के बाद भी पंचायत अपने रवैये से बाज नहीं आ रहा । क्योंकि अगर अधिकारियों ऐसे भ्रष्टाचार के समर्थन करें तो आम व्यक्ति क्या ही कर सकता हैं।
 
ग्राम पंचायत को पता ही नहीं कि एस्टीमेट में क्या मटेरियल
प्राप्त सूचना के आधार में नाली में लग रहे मटेरियल और इस्टीमेट की जानकारी ग्राम पंचायत सचिव खोजवा को पता ही नहीं की कहां पर क्या मटेरियल  लगाना है और कितना लगाना है , आपको बता दे कि महज 120 मीटर की नाली को एक सांप सीढ़ी की डिजाइन दिया गया और बात करें मटेरियल की तो लोकल सरिया लगाया जा रहा जिसकी कितने  में लगाना हैं और कितना लगाना हैं कुछ पता ही नहीं सब भगवान भरोसे चल रहा हैं।
 
इंजीनियर सहित एसडीओ की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत करकटी की मानो तो अधिकारियों के संरक्षण में फल फूल रहा हैं। क्योंकि कार्य कोई भी न तो कार्यों की जानकारी इंजीनियर को पता और न ही एसडीइओ को , जब भी इन अधिकारियों से अगर कोई भी जानकारी लेने चाहे तो फोन तो उठता ही नहीं । एक कहावत तो सुनी ही होगी अपने ढूढने पर भगवान मिल जायेंगे लेकिन हमारे शहडोल के इंजीनियर और एसडीईओ नहीं।

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