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घटिया चीनी उपकरणों से ध्वस्त यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था
धन की बन्दर बाँट की जा रही है, उससे इस आशंका को भी बल मिल रहा है कहीं इन घोटालों का पैसा आतंकी स्लीपर सेल के माध्यम से आतंकी कार्यवाही में तो नहीं इस्तेमाल हो रहा है
उत्तम स्वास्थ्य व्यवस्था उत्तर प्रदेश की जरूरतमंद जनता की हमेशा से आवश्यकता रही है परन्तु जिम्मेदारों द्वारा स्वस्थ्य विभाग के दलालों से मिलकर उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में घटिया चीनी जीवन रक्षक उपकरण स्थापित करके खुली लूट की जा रही है, इस लूट से उत्तर प्रदेश का कोई भी चिकित्सा संस्थान अछूता नहीं है l
भारत सरकार के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को लगाते चूना
SGPGI के टेंडर संख्या GEM/2025/B/6369110 DT. 21/06/25, ITEM CARDIAC MONITOR WITH DEFEB QTY 16 में 6 कंपनियों ने प्रतिभाग किया था, टेक्निकल बिड में केवल 2 कंपनियों को पास किया गया, जिसमे से एक कंपनी एडवांस मेडिकल सिस्टम्स है (ADVANCE MEDICAL SYSTEMS) जिसने टेंडर में मांगे गए उपकरण के लिए जिस निर्माता कंपनी का अथॉरिटी लेटर लगाया है,

केंद्र सरकार के नियम RULE 144(xi) OF GFRs,2017 का उलंधन
केंद्र सरकार के इस नियम के द्वारा भारतीय सीमा से जुड़े देश की कम्पनियाँ तब तक भारत में कारोबार नहीं कर सकती है और न ही अपने उपकरण टेंडर के माध्यम से सरकार को बेच सकती है जब तक उनके पास केंद्रीय गृह मंत्रालय से और केंद्रीय विदेश मंत्रालय से सुरक्षा क्लीरेंस न हो, परन्तु भ्रष्ट अधिकारी और शातिर दलाल किसी भी नियम क़ानून की परवाह न करते हुए अपनी जेबें भरने के लिए घटिया चीनी उपकरण स्थापित करके जनता को मौत के मुंह में धकेल रहे है, इन सारे प्रकरणों की लिखित शिकायत होने पर भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है l
M/S SYSMED MEDICAL TECHNOLOGIES PVT LTD द्वारा SHENZHEN Mindray Bio-Medical Electronics Co. Ltd के उपकरणों को अपने मॉडल “TOP NOTCH” के नाम से बेचा जा रहा है और उसके पीछे भी शातिर दलाल शामिल है, यह कंपनी सिर्फ एक मुखौटा कंपनी है

अभी हाल में ही हुए नयी दिल्ली लाल किले विस्फोट में उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई नाम सामने आये है, क्युकी जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग में हर टेंडर में घोटाले किये जा रहे है और सरकार धन की बन्दर बाँट की जा रही है, उससे इस आशंका को भी बल मिल रहा है कहीं इन घोटालों का पैसा आतंकी स्लीपर सेल के माध्यम से आतंकी कार्यवाही में तो नहीं इस्तेमाल हो रहा है ?
अभी हाल में ही प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग द्वारा भोपाल लखनऊ और मुंबई में छापेमारी करके POCT SCIENCE HOUSE PVT LTD के निदेशक जीतेन्द्र तिवारी, सुनैना तिवारी, राजेश गुप्ता और शैलेन्द्र तिवारी को घटिया चीनी उपकरण सप्लाई एवं स्वास्थ्य विभाग में घोटाले के कारन जेल भेजा है, लेकिन उत्तर प्रदेश की जांच एजेंसियां सोई हुयी है

केंद्रीय जांच एजेंसी को उत्तर प्रदेश में भी यह जांच करनी चाहिए और दोषियों को जेल भेजना चाहिए, यह उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग में चल रहे भयमुक्त संगठित भ्रष्टाचारी गिरोह द्वारा की जा रही लूट का खुलासा है, विभागीय मंत्री इन सबसे बेखबर है, विभागीय मंत्री की यह जिम्मेदारी है की इस प्रकार की लूट को रोकें और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करके उनको जेल भेजें, अगर विभागीय मंत्री इस लूट को रोकने में असफल रहते है l
तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को अपने अधीन लेकर इस प्रकार की लूट को रोकना होगा क्यूंकि सरकार के मुखिया होने के नाते उत्तर प्रदेश की जनता को उत्तम स्वास्थ्य व्यवस्था देने की जिम्मेदारी उनकी है
उत्तर प्रदेश की जनता के हित में स्वतंत्र प्रभात की खोजी टीम ............

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