1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में सज्जन कुमार बरी
ब्यूरो प्रयागराज। 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा और दंगों के एक मामले में बरी कर दिया है. यह फैसला उस समय आया है जब सज्जन कुमार पहले से ही दंगों के अन्य मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
जनकपुरी और विकासपुरी मामले की पृष्ठभूमि में 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों से जुड़ा है. 1 नवंबर 1984 को जनकपुरी में दो सिखों सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या कर दी गई थी. जिसे जनकपुरी कांड और 2 नवंबर 1984 को विकासपुरी कांड में गुरुचरण सिंह नाम के व्यक्ति को भीड़ ने आग के हवाले कर दिया था. इन मामलों में 2015 में केंद्र सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने नई एफआईआर दर्ज की थी. हालांकि, 2023 में कोर्ट ने सज्जन कुमार को हत्या (302) और आपराधिक साजिश (120B) के आरोपों से पहले ही डिस्चार्ज कर दिया था, लेकिन दंगों और भीड़ को उकसाने के आरोपों पर ट्रायल जारी रहा।
इस ताजा फैसले में बरी होने के बावजूद सज्जन कुमार जेल में ही रहेंगे. इसके दो मुख्य कारण हैं. पहला दिल्ली हाई कोर्ट ने दिसंबर 2018 में राज नगर (पालम कॉलोनी) इलाके में 5 सिखों की हत्या के मामले में सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. साथ ही फरवरी 2025 में एक अन्य निचली अदालत ने उन्हें सरस्वती विहार मामले (जसवंत सिंह और उनके बेटे की हत्या) में भी दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. सज्जन कुमार फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।

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