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सरकारी डाक्टरो द्वारा केयर हॉस्पिटल संचालित किए जाने के लग रहे आरोप
बेहतर इलाज का शब्द भाग दिखाकर अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों की ढीली की जा रही जेबें
लखीमपुर खीरी
स्थानीय शहर लखीमपुर में राजापुर मंडी रोड पर संचालित केयर हॉस्पिटल में सरकारी डॉक्टरों द्वारा मरीज भर्ती कर इलाज किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में तैनात दर्जनों डॉक्टर व सर्जनों द्वारा खुलेआम प्राइवेट प्रैक्टिस किए जाने की चर्चाओं का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है ।
आलम यह है कि कई फिजिशियन अपनी क्लीनिक / निजी अस्पताल चला रहे हैं तो कई डॉक्टर शहर में संचालित प्राइवेट अस्पतालों में प्रैक्टिस करते देखे जा सकते हैं। विभागीय गोपनीय सूत्रों द्वारा नाम न उजागर करने की शर्त पर कई डॉक्टरों के नाम और उनके द्वारा संचालित अस्पतालों और क्लिनिको का खुलासा करते हुए बताया की सभी अपनी-अपनी क्लीनिके और अस्पताल चला रहे हैं यहां तक शहर में संचालित हाईवे हॉस्पिटल में भी एक जिला अस्पताल के नामचीन डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते दिखाई पड़ रहे हैं।
शहर में दर्जनों सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं और जिले के ईमानदार मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संतोष गुप्ता को इसकी भनक तक नहीं है। जिसके चलते जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं ।सूत्र बताते हैं की केयर हॉस्पिटल सरकारी डॉक्टर के रहमों करम पर ही संचालित हो रहा है यहां पर 2:00 के बाद सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस करते देखा जा सकता है यह केयर हॉस्पिटल डॉक्टर बीके यादव फिजिशियन की पार्टनरशिप में संचालित होने की बात स्वयं डॉक्टर वी.के यादव द्वारा कही गई है
यह मेरा आरोप नहीं है और ना ही मैं इसकी आधिकारिक पुष्टि करता हूं ।डॉक्टर साहब का बयान देते वीडियो भी उपलब्ध है यहां पर अहम सवाल यह उठता है कि सरकार से प्राइवेट प्रैक्टिस भत्ता लेने के बावजूद भी प्राइवेट प्रैक्टिस किए जाने के मामले पर रोक लगाने से जिम्मेदार बचते नजर आ रहे हैं आखिर क्यों? शायद उक्त डॉक्टर पर शासनादेश /शासन द्वारा जारी गाइडलाइन लागू ही न होती हो इसलिए कार्रवाई न हो रही हो या फिर कोई अन्य विशेष कारण हो सकता है। फिलहाल मामला जन चर्चा का विषय बना है ।अब देखना है कि जिम्मेदार क्या एक्शन लेते हैं?

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