बस्ती में लाइसेंस का ‘गणित’ समझ से परे, मेडिकल और पैथोलॉजी रजिस्ट्रेशन पर उठे सवाल

मानक अधूरे, फाइलें पूरी — सीएमओ कार्यालय की प्रक्रिया पर जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म

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बस्ती। बस्ती जिले में मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी केंद्रों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसने स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में ऐसी जानकारियाँ सामने आई हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि मानक और मंजूरी के बीच की दूरी कभी-कभी बहुत छोटी हो जाती है।
 
जानकारी के अनुसार, कुछ मामलों में मानक अधूरे होने के बावजूद लाइसेंस प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाया गया। विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटने वाले कई आवेदकों का कहना है कि फाइलों की गति अक्सर “प्रक्रियागत समझ” पर निर्भर करती है। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
 
स्वास्थ्य विभाग के नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी संचालन के लिए बुनियादी ढांचा, योग्य फार्मासिस्ट और उपकरण अनिवार्य हैं। लेकिन जिले में संचालित कुछ केंद्रों की स्थिति इन मानकों से मेल नहीं  खाती दिखाई देती।स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोरों पर है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है। यदि ऐसा है तो यह केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है।
 
क्योंकि किसी भी प्रकार की लापरवाही का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ सकता है।विशेषज्ञों का मानना है किसभी लाइसेंसों की सार्वजनिक सूची जारी की जानी चाहिए निरीक्षण रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराई जानी चाहिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैकिंग से जोड़ा जाएस्वतंत्र स्तर पर सत्यापन अभियान चलाया जाए अब सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस पर स्पष्टता देगा?क्या रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप है? या फिर जिले में लाइसेंस का कोई अलग ही “गणित” चल रहा है?

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