धर्म की पवित्रता पर संकट: वैष्णो देवी मंदिर के समारोह में शराब परोसने पर उठा विवाद
एचसीएफ ( Hindu Canadian Foundation ) ने इसे “घोर अधार्मिक और हिंदू-विरोधी” परंपरा बताया है।
स्वतंत्र प्रभात:-
गणेश चतुर्थी का पावन पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि हमारी परंपराओं और आस्था को बचाने का संकल्प है। ऐसे समय में जब देशभर के श्रद्धालु विघ्नहर्ता श्री गणेश से आशीर्वाद लेकर धर्म की पुनर्स्थापना की प्रार्थना कर रहे हैं, माता वैष्णो देवी मंदिर की कार्यकारी समिति का एक निर्णय श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहराई से आहत कर रहा है।
मंदिर के ध्वज तले आयोजित दिवाली समारोह में मदिरा परोसने की अनुमति दी गई है। धार्मिक धरोहर और सांस्कृतिक मान्यताओं के विपरीत लिया गया यह निर्णय अब बड़े विवाद का रूप ले चुका है। एचसीएफ ( Hindu Canadian Foundation ) ने इसे “घोर अधार्मिक और हिंदू-विरोधी” परंपरा बताया है। फोरम का कहना है कि यह निर्णय न केवल युवाओं को गलत दिशा में ले जाने वाला है, बल्कि त्योहारों की पवित्रता और मंदिर की गरिमा को भी गंभीर क्षति पहुँचाता है।

फोरम ने आरोप लगाया कि मंदिर अध्यक्ष केशव अग्निहोत्री ने इस मुद्दे पर अब तक कोई प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण नहीं दिया है। आस्था से जुड़े मामलों में चुप्पी को भक्त मिलीभगत मान रहे हैं। एचसीएफ के एक सदस्य ने कहा “हम लगातार तीन वर्षों से इस प्रथा को समाप्त करने की माँग कर रहे हैं। अपीलों के बावजूद समिति की निष्क्रियता आस्था और परंपरा के साथ खिलवाड़ है।”
समुदाय की माँग
श्रद्धालुओं ने कहा कि मंदिर के नाम पर आयोजित किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में शराब परोसना तुरंत बंद होना चाहिए। मंदिर और त्योहारों का स्वरूप हमेशा पारिवारिक, आध्यात्मिक और पवित्र रहना चाहिए।
तुरंत कदम उठाएँ:
समुदाय ने भक्तों से अपील की है कि वे कार्यकारी समिति को सम्मानजनक लेकिन दृढ़ ईमेल भेजें और उनसे माँग करें कि इस परंपरा पर तुरंत रोक लगाई जाए।
सुझाव:
“दिवाली की पवित्रता बनाए रखें, वैष्णो देवी मंदिर कार्यक्रम में शराब परोसना बंद करें”


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