एकता और आस्था का संगम: महाकुम्भ ने दिया 'वसुधैव कुटुम्बकम' का संदेश।
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स्वतंत्र प्रभात।
ब्यूरो प्रयागराज।दया शंकर त्रिपाठी
महाकुम्भनगर, ।
मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर महाकुम्भ के पहले अमृत स्नान ने एकता और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। संगम तट पर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भारतीय संस्कृति और आस्था की गहराई को अनुभव किया। हर राज्य, हर जाति और दुनिया के विभिन्न देशों से आए लोगों ने संगम में पवित्र स्नान कर 'वसुधैव कुटुम्बकम' का संदेश दिया।

संगम तट पर एकता का महाकुम्भ
महाकुम्भ के पहले अमृत स्नान पर संगम का तट श्रद्धालुओं से खचाखच भरा नजर आया। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश और बिहार सहित देश के कोने-कोने से आए लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई। वहीं अमेरिका, इजरायल, फ्रांस और ईरान जैसे देशों से आए विदेशी नागरिक भी बम बम भोले और हर हर गंगे के जयकारों में शामिल हुए। संगम पर आस्था का ऐसा दृश्य था कि रेत तक नजर नहीं आ रही थी, हर ओर श्रद्धालु ही श्रद्धालु थे।
विदेशी श्रद्धालुओं को भायी भारतीय संस्कृति

महाकुम्भ में शामिल होने पहुंचे विदेशी नागरिक भारतीय सनातन संस्कृति से गहरे प्रभावित हुए। अमेरिका से आए जैफ ने कहा, "यहां की ऊर्जा और शांति अद्भुत है। लोग बहुत दोस्ताना हैं और यहां का वातावरण एक बड़े मंदिर जैसा महसूस होता है।" इसी तरह ईरान से आई एक महिला ने कहा, "कुम्भ का आयोजन बेहद सुव्यवस्थित है। यह हमारी उम्मीदों से कहीं बेहतर है।"
भारत की सांस्कृतिक धरोहर की वैश्विक ब्रांडिंग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस बार महाकुम्भ का आयोजन दिव्य और भव्य तरीके से किया गया। यह आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को प्रकट करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ब्रांडिंग को भी बढ़ावा देता है। पहले अमृत स्नान पर हजारों विदेशी श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया और भारतीय परंपरा को करीब से जाना।

सुव्यवस्था से प्रभावित हुए श्रद्धालु
विदेशी श्रद्धालु भारत की सफाई और व्यवस्था से काफी प्रभावित नजर आए। अमेरिका की पॉला ने टूटी-फूटी हिंदी में कहा, "आज बहुत उत्तम दिन है। साधुओं के साथ स्नान करने का सौभाग्य मिला।" श्रद्धालुओं ने कुम्भ मेले की स्वच्छता और सुव्यवस्था की सराहना की। हर 15 मीटर पर कूड़ेदान उपलब्ध होने से सफाई व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक
महाकुम्भ ने साबित कर दिया कि यह न केवल भारत का सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि पूरे विश्व को एकता, आस्था और 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश देने वाला एक मंच भी है। श्रद्धालुओं ने उत्साह और भक्ति के साथ इस आयोजन में हिस्सा लिया और भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति को नमन किया।
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