घूसखोरी की मलाई काट रहे प्रभारी एडीओ समेत चार दोषी सफाई कर्मियों पर गिरी गाज

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अंबेडकरनगर।अम्बेडकरनगर में नहीं किया जा रहा था निदेशक पंचायती राज उत्तर प्रदेश के आदेश का अनुपालन। निदेशक पंचायती राज उत्तर प्रदेश लखनऊ के सख्त आदेश के बावजूद ग्राम सभाओं में सफाई कर्मियों को न भेज कर सफाई कर्मचारी द्वारा कार्यालयों में कार्य लिया जा रहा है। जिसका प्रमाण जनपद के एडीओ पंचायत कार्यालय भीटी में घूस लेते हुए वीडियो में प्रमाणित हुआ यानी निदेशक पंचायती राज एवं डीपीआरओ के द्वारा गत वर्ष निर्गत किये आदेश जिसमें आकांक्षात्मक विकासखंड भीटी, भियांव, टांडा की कार्यालयों में संबद्ध किए गए सफाई कर्मचारी को उनके गांव में भेजने का आदेश दिया गया था का अनुपालन न करके आदेश की धज्जियां ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा उडाई जा रही थी।
 
सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद मीडिया द्वारा खबर प्रकाशित की गयी। खबरो के प्रकाशन को संज्ञान में लेकर जिला पंचायतराज अधिकारी ने प्रभारी एडीओ पंचायत भीटी अंबेडकरनगर रामजीत शास्त्री सहित दोषी चारों सफाई कर्मियों राम सहाय यादव, बृजमोहन, शिव शंकर यादव, लालचंद यादव के ऊपर विभागीय कार्यवाही करते हुए निलंबित कर दिया। बताया जाता है कि दोषी सफाई कर्मचारीगण उपरोक्त सफाई कर्मी उपस्थिति प्रमाण पत्र/ पे रोल के साथ पे रोल भेजने के नाम पर प्रति सफाई कर्मी 200 रुपए की दर से अवैध वसूली करते हुए घूस ले रहे थे।
 
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मामले में प्रभारी एडीओ पंचायत रामजीत शास्त्री व चार सफाई कर्मी निलंबित किये गये है। जिनमें राम सहाय यादव, लालचंद यादव, बृजमोहन एवं शिवशंकर यादव को जिला पंचायत राज अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डीपीआरओ अवनीश श्रीवास्तव से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन फोन पहुंच बाहर बताता रहा। गोपनीय सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिली है कि खबर छपने से घबराए दोषी सफाई कर्मचारीगण उपरोक्त अपने आप को निर्दोष साबित करने के लिए तमाम तरह का जुगाड़ फिट कर रहे हैं तथा षड्यंत्र कर रहे हैं और फिसड्डी होने पर अनाप-शनाप  बोल रहे हैं। वायरल वीडियो को झूठा साबित करने के लिए तमाम तरह का षड्यंत्र कर रहे हैं।
 
चर्चा है कि वीडियो वायरल करने वाला सफाई कर्मी दोषी प्रभारी एडीओ पंचायत रामजीत शास्त्री का भांजा बताया जाता है। रामजीत शास्त्री अपने अधिकार बल का प्रयोग करके सफाई कर्मी सुनील कुमार से एक पत्र भी अपने नाम लिखवा लिया है। जिसमें  में लिखा है कि मेरी तबीयत खराब है। दिमाग का इलाज चल रहा है। दवाई हार्ड होने के कारण मेरा दिमाग चढ जाता है।
 
वीडियो बनाने के लिए एवं उसे वायरल करने के लिए उच्चाधिकारियों से अपनी गलती माना है और क्षमा याचना किया है। अब सवाल यह उठना है कि जो व्यक्ति बीमार है। उसका दिल दिमाग मौके पर ठीक नहीं है तो उसके उसके द्वारा एडीओ पंचायत भीटी रामजीत शास्त्री के नाम लिखित प्रार्थना पत्र क्या सत्य हो सकता है?
 
यह अपने आप में सवाल उठाता है और यह साबित करता है अपने को निर्दोष साबित करने के लिए कि सफाई कर्मचारी उक्त पर दबाव बनाकर उल्टा सीधा प्रार्थना पत्र लिखवाया/लिखा जा रहा है। जिससे साबित होता है दोषी सफाई कर्मीगण एवं एडीओ पंचायत अपने-आप को बचाने के लिए तमाम तरह के जुगत लगा रहे हैं लेकिन वह सफल नहीं हो रहे हैं और सच्चाई पर पर्दा डालने के लिए नाकाम कोशिशें कर रहे हैं। सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के वसूलों से, कभी खुशबू आ नहीं सकती कागज की फूलों से।
 
वायरल वीडियो की सच्चाई पर दोषी कर्मचारीगण उपरोक्त पर्दा डालने की कोशिश में लगातार लगे हुए हैं। वीडियो वायरल कर्ता सफाई कर्मी सुनील कुमार पर तरह-तरह का दबाव बनवाकर उससे अनाप-शनाप बोलवा रहे हैं ताकि दोषी कर्मचारीगण अपने आपको निर्दोष साबित करने में सफल हो सके।

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