जल्दी शुरू हो सकते हैं प्लास्टिक के नोट
आरबीआई कर रहा है तैयारी
संवाददाता सचिन बाजपेई
नई दिल्ली, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) जल्द ही प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोट जारी करने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है। कागजी नोटों की बढ़ती मांग, मुद्रण लागत में तेज वृद्धि और जल्द खराब होने वाली करेंसी को ध्यान में रखते हुए आरबीआई एक दशक पुरानी योजना को पुनर्जीवित कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही 10 और 20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है।
आरबीआई की योजना और पृष्ठभूमि
आरबीआई के पिछले दो बोर्ड मीटिंग्स (पटना और मुंबई) में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई है। प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई एक पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा करने वाला है, जिसमें पॉलीमर नोटों को आम जनता के बीच परीक्षण के लिए जारी किया जाएगा। यह योजना 2012 में शुरू की गई थी, जब पांच शहरों में 10 के पॉलीमर नोटों का पायलट चलाया गया था। लेकिन उस समय एटीएम मशीनें इन मोटे नोटों को हैंडल नहीं कर पाती थीं, जिसके कारण योजना रोक दी गई। अब तकनीकी प्रगति के साथ यह समस्या हल हो चुकी है।
क्यों ला रहा है आरबीआई प्लास्टिक नोट?
-बढ़ती करेंसी डिमांड: डिजिटल पेमेंट्स के बावजूद भौतिक करेंसी की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में करेंसी इन सर्कुलेशन 42.86 ट्रिलियन के करीब पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में 11.5% अधिक है।
-मुद्रण लागत का बोझ:वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने पर 6,373 करोड़ खर्च हुए। कागजी नोट जल्दी गंदे और फट जाते हैं, जिससे हर साल अरबों नोट वापस लिए जाते हैं।
टिकाऊपन: पॉलीमर नोट कागजी नोटों की तुलना में 3-4 गुना अधिक टिकाऊ होते हैं। ये पानी, गंदगी और फटने से ज्यादा सुरक्षित रहते हैं।
जालसाजी रोकथाम: पॉलीमर नोटों में बेहतर सिक्योरिटी फीचर्स लगाए जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों को बनाना और मुश्किल हो जाएगा।
पॉलीमर नोट क्या हैं?
पॉलीमर नोट प्लास्टिक जैव-आधारित पॉलीप्रोपाइलीन या समान सामग्री से बने होते हैं। दुनिया भर में 60 से ज्यादा देश (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन आदि) पहले से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। ये नोट लंबे समय तक चलते हैं, जिससे लंबे समय में सरकार और आरबीआई को लागत बचत होती है।
चरणबद्ध रणनीति
आरबीआई तुरंत सभी नोटों को प्लास्टिक में बदलने की योजना नहीं बना रहा है। पहले चरण में छोटे मूल्यवर्ग (₹10 और ₹20) के नोटों का पायलट लॉन्च होगा। पायलट की सफलता के बाद ही बड़े नोटों पर विचार किया जाएगा। एटीएम और मुद्रण प्रक्रिया को भी अपडेट किया जाएगा।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, शुरुआती चरण में जनता को नई नोटों की आदत डालने और सप्लाई चेन में बदलाव की चुनौतियां भी होंगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में यह पहल करेंसी मैनेजमेंट को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।अभी देखना बाकी है कि पायलट प्रोजेक्ट कब शुरू होता है और आम लोगों की प्रतिक्रिया क्या होती है। अगर सब ठीक रहा तो आने वाले समय में आपके बटुए में प्लास्टिक के नोट भी दिख सकते हैं।
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