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"इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड" में दर्ज हुए दो नए कीर्तिमान
जनपद के सभी 899 ग्राम पंचायतों में एक साथ आयोजित ग्रीन चौपाल में पेट्रोल डीजल की खपत को कम करने का प्रस्ताव किया गया पारित
“अधिकतम ग्राम पंचायतों द्वारा आयोजित ग्रीन चौपाल जागरूकता कार्यक्रम” का रिकॉर्ड हुआ दर्ज
“सबसे कम समय में सबसे बड़ा ग्रीन चौपाल जागरूकता कार्यक्रम” के रूप में अंबेडकरनगर बना मिसाल
ग्राम प्रधानों ने पेट्रोल एवं डीजल में कटौती करने का उठाया बीड़ा, एक साथ सभी 899 ग्राम पंचायतों ने पेट्रोल डीजल की खपत कम करने का प्रस्ताव पास किया।
अम्बेडकरनगर।
शासन के निर्देशानुसार आज जनपद के पांचों तहसीलों व 09 विकास खंडों के सभी 899 ग्राम पंचायतों में आज पूर्वाह्न 09 से 10 बजे तक ग्रीन चौपाल का आयोजन हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में जन सहभागिता देखने को मिली।

ग्रीन चौपाल के दौरान ग्राम पंचायतों द्वारा देश के प्रधानमंत्री एवं सूबे के मुख्यमंत्री के पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा बचत संबंधी आह्वान को जन–जन तक पहुंचाते हुए पेट्रोल एवं डीजल की खपत कम करने हेतु महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इस दौरान ग्राम प्रधानों ने पेट्रोल एवं डीजल में कटौती करने का बीड़ा उठाया। पंचायतों ने सार्वजनिक परिवहन, साझा वाहनों (कार पूलिंग), इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के उपयोग तथा हरित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया।

जिलाधिकारी ईशा प्रिया के कुशल निर्देशन एवं ग्राम प्रधानों के सक्रिय नेतृत्व में जनपद की सभी 899 ग्राम पंचायतों में एक ही समय पर आयोजित इस व्यापक जनभागीदारी कार्यक्रम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए जनपद अंबेडकरनगर का नाम “इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड” में दर्ज करा दिया।

जिलाधिकारी ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से जनपद ने दो महत्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पहला कीर्तिमान “अधिकतम ग्राम पंचायतों द्वारा एक साथ एक समय में आयोजित ग्रीन चौपाल जागरूकता कार्यक्रम” तथा दूसरा कीर्तिमान “सबसे कम समय में सबसे बड़ा ग्रीन चौपाल जागरूकता कार्यक्रम” के रूप में दर्ज हुआ है।
सभी ग्राम पंचायतों में आयोजित ग्रीन चौपालों में आगामी वृक्षारोपण महोत्सव पर हर परिवार द्वारा कम से कम पांच पांच पौधों को रोपित करने तथा उसकी सुरक्षा एवं देखभाल सुनिश्चित करने, "हर बूंद की रक्षा" अर्थात जल संचयन एवं जल संरक्षण करने, गो–संरक्षण, स्वच्छता अभियान को सफल बनाने हेतु अपने घर एवं गांव को साफ–सुथरा रखने, गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्रित का उसका बेहतर निस्तारण सुनिश्चित करने, हरित खेती स्वस्थ धरती के अंतर्गत जैविक खेती प्राकृतिक कृषि एवं मृदा संरक्षण आधारित तकनीक को अपनाए जाने, ऊर्जा बचाओ भविष्य बचाओ के अंतर्गत सौर ऊर्जा एलईडी एवं ऊर्जा संरक्षण आधारित उपायों को अपनाने, महिलाओं, युवाओं एवं स्वयं सहायता समूह एवं विद्यालयों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने, पर्यावरण शिक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने, पराली एवं खुले में कचरा जलाने पर रोक, जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा कर उसे अपनाने का प्रस्ताव ग्रीन चौपाल हेतु पंचायत स्तरीय समितियों पारित किया गया।
ग्रीन चौपाल में मानसून को देखते हुए प्री–मानसून अवधि में प्री प्लांटेशन गतिविधियों जैसे स्थल चयन, गड्ढा खुदान। मृदा कार्य एवं पौध संरक्षण संबंधी समस्त तैयारियों को 30 जून तक पूर्ण कर वृक्षारोपण महोत्सव/मानसून अवधि में गुणवत्तापूर्ण एवं सफल वृक्षारोपण सुनिश्चित करने हेतु एक माह की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
899 ग्राम पंचायतों में एक साथ आयोजित ‘ग्रीन चौपाल’ बना जनजागरूकता का ऐतिहासिक अभियान— प्रभारी मंत्री गिरीश चंद्र यादव
प्रभारी मंत्री, खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस अभिनव एवं सराहनीय पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि जनपद की 899 ग्राम पंचायतों में एक ही समय पर आयोजित “ग्रीन चौपाल” एक व्यापक जनजागरूकता अभियान है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर एक साथ आयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा बचत के प्रति जनसामान्य को जागरूक करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री एवं सूबे मुख्यमंत्री के आह्वान के अनुरूप इस वृहद ग्रीन चौपाल अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक पेट्रोल एवं डीजल की खपत कम करने का संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाया गया है। अभियान के माध्यम से लोगों को साझा वाहनों के उपयोग, कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन तथा पर्यावरण अनुकूल परिवहन साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रभारी मंत्री ने जनसामान्य से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक व्यक्तिगत स्तर पर पेट्रोल एवं डीजल की खपत को न्यूनतम करने का संकल्प ले तथा आवश्यकता अनुसार ही वाहनों का प्रयोग करे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप ऊर्जा संरक्षण एवं हरित परिवहन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, जिसमें जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


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