प्रदेश सरकार विभिन्न समस्याओं से पीड़ित महिलाओं को दे रही है निःशुल्क आवासीय सुविधा

आश्रय सदन में निराश्रित महिलाओं को निःशुल्क भरण-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, वस्त्र, विस्तर आदि की व्यवस्था

राजेश तिवारी Picture
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सोनभद्र / उत्तर प्रदेश -

संविधान और उसकी प्रस्तावना में, मूल अधिकार, मूल कर्तव्य और नीति निर्देशक तत्वों में भी नागरिकों की समानता निहित हैं, जिसके फलस्वरूप इस देश में लैंगिक भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। संविधान न केवल महिलाओं को समानता का अधिकार देता है, बल्कि राज्यों को यह अधिकार देता है कि समानता लाने के लिए वह महिलाओं के प्रति सकारात्मक विभेदीकरण की योजनायें बना सकते हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में महिलाओं को विभिन्न विकास सम्बन्धी कार्यक्रमों से सम्बद्ध करके उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति सुधारने में मदद करने के उद्देश्य से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला सशक्तीकरण मिशन के अन्तर्गत महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए कई योजनायें संचालित कर उनका उत्थान किया है। 

हब फार इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन

इस योजना का उद्देश्य महिलाओं ने सम्बन्धित विभिन्न मुद्दों जैसे-घरेलू हिंसा, दहेज, शिक्षा, स्वास्थ्य, अधिकार, जेंडर, यौन हिंसा आदि के संबंध में जागरूकता लाना है। ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग करना, योजना के संचालन के लिए प्रदेश स्तर पर 8 एवं प्रत्येक जनपद में 07 कार्मिकों का करना प्रमुख है। इस योजना की प्रमुख गतिविधियों में महिलाओं की लिए उपलब्ध योजनाओं और सुविधाओं के संबंध में महिलाओं को जानकारी प्रदान करना तथा उनका लाभ प्राप्त करने में सहायता करना है।

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इस योजना के अन्तर्गत जिला/ब्लॉक स्तर पर सरकारी पदाधिकारियों को संवेदनशील बनाना और उन्हें ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बनाई गई विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों के बारे में उन्मुख करना, लैंगिक समानता के लिए जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान आयोजित किया जाता है। बीपीएल सर्वेक्षण, आधार (यूआईडी), मनरेगा, नामांकन जैसे मौजूदा सरकारी तंत्रों के माध्यम से सरकारी कार्यक्रमों में नामांकन हेतु महिलाओं को सहायता प्रदान किया जाता है। शौर्य दल जैसे समूहों में शामिल होने के लिए महिलाओं को एकजुट करना और ग्रामीण स्तर पर मौजूदा समूहों को मजबूत करने में मदद करना आदि प्रमुख कार्य है। प्रदेश में यह योजना वित्तीय वर्ष 2022-23 से संचालित है, इस योजना में 2022-23 से 2025-26 तक कुल 51 हजार से अधिक गतिविधियों के माध्यम से 56 लाख से अधिक महिलाओं तथा बालिकाओं को सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जागरूक किया गया है।

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सखी निवास

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उत्तर प्रदेश में कामकाजी महिलाओं को शहरी-नगरीय क्षेत्रों में सस्ती दरों पर सुरक्षित आश्रय प्रदान किये जाने के उद्देश्य से मिशन शक्ति योजनान्तर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के जनपद गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, आगरा, बरेली, मेरठ, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मऊ, मथुरा एवं बुलन्दशहर में 50-50 की क्षमता के कुल 13 सखी निवास का संचालन किये जाने का प्रावधान किया गया है, जिसमें से जनपद लखनऊ एवं वाराणसी में संचालन प्रारम्भ हो गया है तथा शेष में संचालित किये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

शक्ति सदन 

मिशन शक्ति योजना की उप योजना सामर्थ्य के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा विभाग के माध्यम से 11 जनपदों अलीगढ़, आजमगढ़, कानपुर नगर, चित्रकूट, झांसी, गोंडा, बस्ती. मिर्जापुर, वाराणसी एवं सहारनपुर में एक-एक तथा जनपद मथुरा में 04 शक्ति सदन का संचालन किया जाने की व्यवस्था है, जिसमें से जनपद अलीगढ़, कानपुर नगर, झॉसी, गोण्डा, मिर्जापुर एवं सहारनपुर में संचालन प्रारम्भ हो गया है तथा शेष में संचालित किये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

कृष्ण-कुटीर  

जनपद मथुरा में निराश्रित महिलाओं को आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से 1000 की क्षमता के कृष्ण कुटीर आश्रय सदन, वृन्दावन का संचालन वर्ष 2018-19 से महिला कल्याण निगम के माध्यम से किया जा रहा है। इस आश्रय सदन में निराश्रित महिलाओं को निःशुल्क भरण-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, वस्त्र, विस्तर आदि की व्यवस्था है। साथ ही आवासित महिलाओं की काउन्सिलिंग कर उनके परिवार/रिश्तेदार के साथ पुनर्वासित कराया जाता है। जनपद मथुरा में निराश्रित महिलाओं हेतु वृन्दावन, जनपद मथुरा में संचालित कृष्ण कुटीर आश्रय सदन में वर्तमान में 386 से अधिक महिलाएं निवासरत हैं।

राजकीय महिला शरणालय 

महिला कल्याण विभाग के अन्तर्गत महिलाओं की सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु प्रदेश में राजकीय महिला शरणालय-संरक्षण गृह का संचालन किया जा रहा है, जिसमें भारतीय दण्ड संहिता में वांछित साक्ष्य हेतु प्रस्तुत की जाने वाली पीड़ित महिलाओं, घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम, 2005 के अन्तर्गत पीड़ित महिलाओं, भटकी हुई नैतिक संकट से ग्रसित संरक्षण की आवश्यकता वाली एवं जरूरतमंद महिलाओं को रखे जाने का प्राविधान है। इन गृहों में महिलाओं को निःशुल्क भरण-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, वस्त्र, बिस्तर, कौशल विकास प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था है। इस योजना के अन्तर्गत वर्तमान में प्रदेश के 08 जनपदों में राजकीय महिला शरणालय, 01 जनपद-यथा आगरा में राजकीय संरक्षण गृह (महिला) तथा 01 जनपद- यथा बरेली में मानसिक रूप से अविकसित महिलाओं के प्रकोष्ठ का संचालन किया जा रहा है। इन शरणालयों में वर्तमान में भिन्न-भिन्न समस्याओं से पीड़ित 248 संवासिनी एवं उनके 24 बच्चे आवासित है।

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