सूचना के बाद भी नहीं बच सका प्रतिबंधित गूलर का पेड़, कटरा वन रेंज में वन माफियाओं का आतंक

सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कुछ समय के लिए कटान कार्य रुकवा दिया गया

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गोण्डा। जनपद के कटरा वन रेंज अंतर्गत ग्राम पंचायत भुडकुडी में प्रतिबंधित हरे पेड़ों की कटान का गंभीर मामला सामने आया है, जहां सूचना देने के बावजूद वन विभाग अवैध कटान को रोक पाने में पूरी तरह विफल नजर आया।ग्रामीणों केअनुसार ग्राम पंचायत भुडकुडी में प्रतिबंधित प्रजाति के गूलर के हरे वृक्ष का कटान शुरू होते ही स्थानीय लोगों द्वारा तत्काल कटरा वन रेंजर एवं वन दरोगा को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कुछ समय के लिए कटान कार्य रुकवा दिया गया।

लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों के वापस लौटने के लगभग तीन घंटे बाद ही वन माफियाओं ने दोबारा पहुंचकर उक्त गूलर के पेड़ को काटकर मौके से उठा लिया। इस घटना के बाद क्षेत्र में वन विभाग की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेंजर व वन दरोगा द्वारा वन माफियाओं से सांठगांठ कर ली गई, जिसके चलते प्रतिबंधित वृक्ष को आखिरकार काटकर ले जाया गया। सूत्रों का कहना है कि चाहे आम हो सागौन,शीशम सहित अन्य पेड़ों पर आर्थिक लाभ के लालच में हरे-भरे पेड़ों पर आरा चलवाया जा रहा है तथा सूचना मिलने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय समझौता कर लिया जाता है।

स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं अवैध कटान में शामिल वन माफियाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र की हरियाली पूरी तरह समाप्त हो सकती है।

अब प्रश्न यह उठ रहा है कि सूचना के बावजूद जब पेड़ नहीं बच पाए, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी? इस सम्बन्ध में वन दरोगा इंद्र जीत ने बताया कि जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

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