क्वांटम प्रौद्योगिकी विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया

वैज्ञानिकों ने क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतर्संबद्धता और नाभिकीय भौतिकी पर डाला प्रकाश

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ में “क्वांटम प्रौद्योगिकी” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, अभियंताओं एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। अपने उद्घाटन वक्तव्य में वक्ताओं ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी ने मानव सभ्यता को सेमीकंडक्टर, लेज़र, एमआरआई मशीन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष यात्रा जैसे महत्वपूर्ण आविष्कार प्रदान किए हैं, जिनसे विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव हुए हैं।
 
क्वांटम सिद्धांत की नींव वर्ष 1900 में जर्मन वैज्ञानिक Max Planck द्वारा रखी गई थी, जिन्हें क्वांटम सिद्धांत का जनक माना जाता है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2025 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार क्वांटम टनलिंग के विकास हेतु प्रदान किया गया, जो भविष्य में उच्च-प्रदर्शन (हाई परफॉर्मेंस) कंप्यूटरों के विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
 
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो.(डॉ.) ओंकार प्रसाद, अध्यक्ष, भौतिकी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय उपस्थित रहे। उन्होंने “क्वांटम संगणन” (Quantum Computing) विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने क्यूबिट (क्वांटम बिट), अध्यारोपण सिद्धांत तथा क्वांटम कलन-विधियों की मूल अवधारणाओं को सरल शब्दों में स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार क्वांटम संगणन भविष्य में सांकेतिक सुरक्षा, औषधि अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा जटिल गणनाओं के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है।
 
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो.(डॉ.) लीना सिन्हा ने “क्वांटम अंतर्संबद्धता” (Quantum Entanglement) विषय पर प्रमुख व्याख्यान (प्रथम) दिया। उन्होंने क्वांटम अंतर्संबद्धता की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि, उसके प्रयोगात्मक प्रमाण तथा क्वांटम संचार एवं सांकेतिक लेखन में उसके उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके उपरांत प्रो.(डॉ.) ज्योत्स्ना सिंह ने “नाभिकीय भौतिकी” (Nuclear Physics) विषय पर प्रमुख व्याख्यान (द्वितीय) प्रस्तुत किया।
 
उन्होंने परमाणु संरचना, नाभिकीय ऊर्जा, रेडियोधर्मिता तथा चिकित्सा एवं ऊर्जा उत्पादन में नाभिकीय भौतिकी के अनुप्रयोगों की विस्तृत जानकारी दी। इस कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष इं. वी.पी. सिंह ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक है। उन्होंने बताया कि यह तीव्र गणना, सुरक्षित संचार तथा उन्नत अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर प्रदान कर रही है और देश की वैज्ञानिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
 
इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भी सक्रिय उपस्थिति रही। उन्होंने विषय के प्रति अपनी जिज्ञासा एवं उत्साह व्यक्त करते हुए अपने विचार साझा किए तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी के विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न पूछकर कार्यक्रम को संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक बनाया। इस संगोष्ठी में कार्यक्रम के संयोजक, डॉ. ए.के. जौहरी ने सर आइज़ैक न्यूटन के महान ग्रंथ “Principia” पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह ग्रंथ गुरुत्वाकर्षण के नियम, गति के नियम और ब्रह्मांड की संरचना को समझने का आधार प्रदान करता है।
 
इसके माध्यम से प्रतिभागियों ने न्यूटन के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, उनके प्रयोगों और उनकी खोजों का विश्लेषण समझा, और यह जाना कि कैसे इन सिद्धांतों ने आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में क्रांति लाई। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय संस्था के मानद सचिव इं. एन.के. निषाद, द्वारा किया गया। उन्होंने सभी उपस्थित अभियंताओं एवं गणमान्य सदस्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के उपरांत मध्याह्न भोजन का आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपस्थितजनों ने सहभागिता की।

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