कश्मीर से कोलकाता तमिलनाडु तक आतंक के तार 

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मनोज कुमार अग्रवाल 
 
हाल ही में देश में एक बार फिर बड़ी आतंकी साजिश बेनकाब हुई है. पाकिस्तान आइएसआइ और बांग्लादेश के आतंकी संगठनों की शह पर बड़ी आतंकी साजिश रचने वाले 8 संदिग्धों को कल गिरफ्तार किया गया . उनकी गिरफ्तारी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। बीते दस दिनों में दिल्ली और कोलकाता के कई इलाकों में “फ्री कश्मीर” और “कश्मीर में जनसंहार बंद करो” जैसे पोस्टर लगाने की घटना के बाद शुरू हुई जांच अब एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क तक पहुंच गई है. इस पूरे ऑपरेशन में अब तक कुल 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है 6 तमिलनाडु से और 2 पश्चिम बंगाल से हैं।
 
जांच एजेंसियों के अनुसार, पोस्टर लगाने की घटना के बाद संदिग्ध तुरंत दिल्ली और कोलकाता से निकलकर अपने-अपने ठिकानों पर लौट गए थे. इस मामले में सबसे पहले मालदा से दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जिनसे पूछताछ और मोबाइल डेटा एनालिसिस के आधार पर तमिलनाडु में सक्रिय मॉड्यूल का पता चला. इसके बाद तिरुप्पुर जिले के उथुकुली (2), पल्लडम (3) और तिरुमुरुगनपूंडी (1) स्थित गारमेंट यूनिट्स पर छापेमारी करते हुए छह और आरोपियों को पकड़ा गया.तमिलनाडु से गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबत, उमर, मोहम्मद लितान, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्जल के रूप में हुई है. इनमें से अधिकांश के बारे में पता चला है कि वे बांग्लादेशी नागरिक हैं और भारत में फर्जी आधार कार्ड व नकली पहचान के जरिए रह रहे थे.
 
सभी को पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है. जांच में सामने आया है कि इनका सीधा या परोक्ष संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और बांग्लादेश के आतंकी संगठनों से था. कुछ संदिग्ध हाल ही में बांग्लादेश भी गए थे, जहां वे सक्रिय आतंकी नेटवर्क के संपर्क में आए.सुरक्षा एजेंसियों ने कोलकाता में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की गहरी पैठ और एक सुनियोजित साजिश का सनसनीखेज खुलासा किया है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी उमर फारूक ने कोलकाता महानगर को ही अपना मुख्य परिचालन केंद्र बना लिया था और वह लश्कर के एक सक्रिय हैंडलर के तौर पर काम कर रहा था।
 
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि उमर का संपर्क मार्च 2025 में कश्मीर निवासीसब्बिर अहमद लोन से हुआ था, जिसके बाद कोलकाता को दहलाने की खतरनाक साजिश की पटकथा लिखी गई। इस नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए न केवल हिंदू नामों का सहारा लिया, बल्कि शहर के अति-संवेदनशील धार्मिक स्थलों की रेकी कर उनके वीडियो सीमा पार अपने आकाओं को भेजे।खुफिया एजेंसियों के दावे के मुताबिक, हैंडलर सब्बिर के सीधे निर्देश पर उमर ने कोलकाता में एक किराए का मकान लिया था. जिसे साजिश को अंजाम देने के लिए सेफ हाउस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
 
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि आतंकियों के निशाने पर चांदनी चौक इलाके के पास स्थित एक प्रमुख मंदिर था। उमर और उसके साथियों ने अपनी पहचान छिपाकर इस मंदिर की येह ली और उसका विस्तृत वीडियो बनाकर कश्मीर मेंबैठे अपने हैंडलर को भेजा। माजिश का दायरा केवल रेकी तक सीमित नहीं था सुरक्षा बलों को पुख्ता इनपुट मिले हैं कि यह मॉड्यूल शहर में विस्फोटक और आधुनिक हथियार जुटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर चुका था। दिसंबर 2024 से ही कोलकाता के विभिन्न हिस्सों में रेकी की जा रही थी और माहौल को अस्थिर करने के लिए देश विरोधी पोस्टर लगाने की भी योजना बनाई गई थी।
 
उमर और उसके गिरोह नैखेची-समझी रणनीति के तहत हिंदू नामों का उपयोग किया ताकि स्थानीय लोगों और पुलिस कीरडार से बचा जा सके। खुफियाअधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते इस मॉड्यूल का पर्दाफाश नहीं होता, तो कोलकाता किसी बड़ी आतंकी त्रासदी का गवाह बन सकता था। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां उम्र से मिली जानकारी के आधार पर इस नेटवर्क की अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाया जा रहा है कि महानगर में उन्हें स्थानीय स्तर पर औरकिन लोगों से रसद व अन्य सहायता मिल रही थी।एसटीएफ ने दूसरे के आधार कार्ड पर भारतीय सिम सक्रिय कर उनका ओटीपी पाकिस्तान भेजने बाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
 
मुर्शिदाबाद के बहारमपुर से पकड़े गए आरोपी का नाम सुमन शेख है। वह पुणे में काम के दौरान पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में आया था। जांच में खुलासा हुधा है कि सुमन फर्जी आधार कार्ड के जरिए प्री-एक्टिवेटेड सिम खरीदता और उनके नंबर व व्हाट्सऐप ओटीपी सीमा पार भेज देता था। इसके बदले उसे क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान किया जाता था। इन सिम काईस का इस्तेमाल जासूसी या साइबर ठगी के लिए होने की आशंका है। पुलिस सूत्रों के मुताविक, इस नेटवर्क के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ हो सकता है।
 
आपको पता रहे कि मालदा जिले के मानिकचक थाना अंतर्गत गोपालपुर ग्राम पंचायत के अशिनटोला गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब सुरक्षा एजेंसियों ने लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े होने के संदेह में उमर फारूक नामक युवक को गिरफ्तार किया। साठवीं कक्षा तक पढ़े इस युवक की गिरफ्तारी ने न केवल इलाके में सनसनी फैला दी है, बल्कि राज्य में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल्स की मौजूदगी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे अधिक चौंकाने वाली बात उमर फारूक के परिवार के सदस्यों द्वारा दिए गए बयानों में मौजूद भारी विरोधाभास है ।
 
उमर फारूक की मां ने अपने बयान में एक और बेटे की नासमझी का तर्क दिया है तो दूसरी और अनजाने में ही सही पर एक गंभीर संलिप्तता की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि उमर पूरी तरह अशिक्षित है और उसे किसी भी संगठन की विचारधारा की समझ नहीं है। मां के अनुसार, संभव है कि पैसों के लालच में आकर उसने कुछ पोस्टर लगाए हों, लेकिन उसे यह बिल्कुल भी पता नहीं था कि वे पोस्टर किसी उग्रवादी संगठन के हैं। उन्होंने दावा किया कि उनका बेटा किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी गतिविधि में जानबूझकर शामिल नहीं हो सकता।
 
यहीं दूसरी ओर, उमर की पत्नी ने अपनी सास के दावे को पूरी तरह से खारिज करते हुए अपने पति को बेकसूर और साजिश का शिकार बताया है। पत्नि का कहना है कि उम्र सालों से कोलकाता में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था और उन्होंने कभी भी उसके व्यवहार में कोई संदिग्ध बदलाव या किसी अज्ञात व्यक्ति से उसके संपर्क को नहीं देखा। एजेंसियां फिलहाल उबर के इन अलग-अलग दावों और पारिवारिक विरोधाभासों की बारीकी से जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह कोलकाता में मजदूरी की आड़ में किसी आतंकी मॉड्यूल के लिए स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहा था।
 
अधिकारियों का मानना है कि परिवार के बयानों में यह अंतर किसी बड़ी सच्चाई को छिपाने की कोशिश भी हो सकता है। फिलहाल पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है कि उमर की वास्तविक भूमिका क्या थी और वह किन लोगोंके निर्देश पर काम कर रहा था।दरअसल इन पोस्टर्स का उद्देश्य सोशल नैरेटिव को प्रभावित करना और भारत में अस्थिरता पैदा करना था.
 
जांच एजेंसियां अभी यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन आरोपियों का भारत के किसी स्थानीय मॉड्यूल या अन्य संगठनों से भी संपर्क था. शुरुआती इनपुट बताते हैं कि इस नेटवर्क में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है. फिलहाल 8 संदिग्धों की गिरफ्तारी के साथ सुरक्षा एजेंसियां इसे भारत में सक्रिय एक बड़ी संगठित आतंकी साजिश का महत्वपूर्ण भंडाफोड़ मान रही हैं.वहीं सुरक्षा एजेंसियों को तमिलनाडु और कोलकाता में आतंकी के तार मिलने से हैरत है।

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