खान सर की नई पहल – गरीबों के लिए सुलभ जाँचें

खान सर हॉस्पिटल ने आज पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है

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महेन्द्र तिवारी

 

पटना के पटरी कोटिया इलाके में बसे खान सर हॉस्पिटल ने आज पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रसिद्ध शिक्षक खान सर जो प्रतियोगी परीक्षाओं के कोचिंग क्षेत्र में लाखों छात्रों के प्रेरणास्रोत हैं, ने अब स्वास्थ्य सेवा के मैदान में कदम रखा है। उनकी इस नई पहल में मात्र ₹15 में एक्स-रे और ₹25 में 25 प्रकार की स्वास्थ्य जाँचें उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह सुविधा खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वरदान साबित हो रही है, जहाँ सामान्य अस्पतालों में यही जाँचें ₹500 से ₹2000 तक ले ली जाती हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो और तस्वीरें दर्शा रही हैं कि कैसे सैकड़ों मरीज रोजाना यहाँ पहुँच रहे हैं, और खान सर एक बार फिर जनता के दिलों पर राज कर रहे हैं। लेकिन यह पहल केवल एक क्षणिक हलचल नहीं, बल्कि भारत की स्वास्थ्य असमानता पर गहरा प्रहार है।

खान सर पटेल का सफर हमेशा से ही सामाजिक सेवा से जुड़ा रहा है। 2010 के दशक में यूट्यूब चैनल 'खान जी के दर्शन' से शुरू हुई उनकी यात्रा ने बिहार के गाँव-गाँव तक शिक्षा पहुँचा दी। उनकी संस्था 'जय जय भारत' ने न केवल परीक्षा तैयारी में मदद की, बल्कि सामाजिक जागरूकता अभियान भी चलाए। अब स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रवेश करते हुए उन्होंने पटना में यह हॉस्पिटल स्थापित किया, जो शिक्षा और स्वास्थ्य को जोड़ने का अनोखा मॉडल पेश कर रहा है। जनवरी 2026 में शुरू हुई यह सुविधा जल्द ही वायरल हो गई। खान सर ने एक इंटरव्यू में कहा, "हमारा लक्ष्य है कि कोई गरीब जाँच के अभाव में इलाज से वंचित न रहे। शिक्षा के साथ स्वास्थ्य ही असली विकास है।" हॉस्पिटल में आधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन और लैब उपकरण लगाए गए हैं, जिन्हें कम लागत पर चलाने के लिए सब्सिडी, डोनेशन और स्वयंसेवी स्टाफ का सहारा लिया गया है। दैनिक फुटफॉल 500 से ऊपर पहुँच चुका है, जिसमें मजदूर, रिक्शा चालक, छोटे किसान और दिहाड़ी मजूर प्रमुख हैं।

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इस पहल की सबसे बड़ी ताकत है इसकी सस्ती जाँचें। ₹25 में उपलब्ध 25 बुनियादी टेस्टों में ब्लड शुगर (RBS/FBS), हीमोग्लोबिन (Hb), यूरिन रूटीन, ब्लड यूरिया, सीबीसी (कम्प्लीट ब्लड काउंट), लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) के प्रारंभिक चरण, किडनी फंक्शन, थायरॉइड स्क्रीनिंग और अन्य शामिल हैं। सामान्य प्राइवेट लैबों में ये टेस्ट ₹100 से ₹2000 तक के बीच आते हैं। एक्स-रे की बात करें तो चेस्ट, स्पाइन, हाथ-पैर या डेंटल एक्स-रे सभी ₹15 में हो जाते हैं। प्रक्रिया बेहद सरल है – मरीज टोकन लेता है, 15-30 मिनट इंतजार के बाद जाँच होती है, और रिपोर्ट उसी दिन मिल जाती है। डॉक्टरों की टीम मुफ्त प्रारंभिक परामर्श भी देती है। हॉस्पिटल सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक जाँचें चला रहा है, और इमरजेंसी में 24x7 उपलब्धता की योजना है। एक बुजुर्ग मरीज ने बताया, "निजी क्लिनिक में ₹800 लगते थे एक्स-रे के, यहाँ 15 रुपये में हो गया। अब सही दवा लूँगा।" यह मॉडल कॉस्ट-कटिंग पर आधारित है – मशीनें EMI पर, स्टाफ वॉलंटियर, और फंडिंग शिक्षा संस्था से।

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भारत जैसे विकासशील देश में स्वास्थ्य सेवा की चुनौतियाँ गंभीर हैं। NITI आयोग की 2025 रिपोर्ट बताती है कि 60 प्रतिशत आबादी बुनियादी जाँचों पर भी निर्भर नहीं कर पाती। ग्रामीण बिहार में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य व्यय मात्र ₹1500 सालाना है (NFHS-5 डेटा), जबकि महँगाई ने लैब टेस्ट 20% महँगे कर दिए। कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य बजट बढ़ा जरूर, लेकिन प्राइवेट सेक्टर का वर्चस्व बरकरार। आयुष्मान भारत योजना 50 करोड़ गरीबों को ₹5 लाख का इंश्योरेंस देती है, लेकिन जाँचें अभी भी महँगी। थायरोकेयर या SRL डायग्नोस्टिक्स जैसी चेनें ₹500+ चार्ज करती हैं। खान सर हॉस्पिटल सरकारी अस्पतालों का सप्लीमेंट बन रहा, जहाँ मुफ्त जाँचें तो हैं लेकिन लाइनें घंटों लंबी। इस पहल से प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को बल मिला – लोग अब डायबिटीज, कैंसर या हृदय रोगों को शुरुआती स्टेज में पकड़ रहे। AIIMS पटना के डॉ. एके सिंह जैसे विशेषज्ञ कहते हैं, "यह मॉडल स्केलेबल है, यदि NGO-सरकारी पार्टनरशिप बने।"

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सोशल मीडिया इस पहल का सबसे बड़ा प्रचारक बना। #KhanSirHospital हैशटैग ने 10 लाख से अधिक व्यूज हासिल किए। ट्विटर पर नीतीश कुमार समर्थक लिख रहे, "बिहार मॉडल का नया अध्याय," तो विपक्षी नेता भी सराहना कर रहे। यूट्यूब पर खान सर के वीडियो में दर्शक कमेंट्स उमड़ पड़े – "सच्चे देशभक्त," "अब डॉक्टर भी बन गए।" यह पहल अन्य कोचिंग गुरुओं जैसे अलख पांडे या फिजिक्स वाले भाई को प्रेरित कर रही। लेकिन चुनौतियाँ भी हैं। बढ़ती भीड़ से कभी देरी हो रही, स्टाफ पर दबाव। हॉस्पिटल अब मोबाइल वैन लॉन्च करने की योजना बना रहा, जो गाँवों तक पहुँचेगी। टेलीमेडिसिन, फ्री दवा कैंप और कॉर्पोरेट CSR से फंडिंग के प्रयास चल रहे। सस्टेनेबिलिटी के लिए बिहार सरकार से सब्सिडी की माँग उठी है।

खान सर की यह पहल व्यापक संदर्भ में देखें तो भारत की स्वास्थ्य क्रांति का प्रतीक है। बजट 2026 में स्वास्थ्य पर 15% इजाफा हुआ, लेकिन ग्रामीण फोकस कम। सामाजिक उद्यमिता के दौर में यह मॉडल साबित कर रहा कि व्यक्तिगत पहल से सिस्टम बदला जा सकता है। गरीबों के लिए स्वास्थ्य अब दूर का सपना नहीं, बल्कि पटना के इस छोटे हॉस्पिटल से शुरू हो रही हकीकत। यदि यह सफल रहा, तो पूरे देश में ऐसे केंद्र खुल सकते हैं। खान सर साबित कर रहे हैं – शिक्षा+स्वास्थ्य ही 'विकसित भारत' का आधार है। देश को ऐसे और योद्धाओं की जरूरत।

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