कब्र के नारे, मोदी के मारे: विरोधियों की छुट्टी
नफरत के ज्वालामुखी पर विकास की बारिश, सदन में गरजती सच्चाई: मोदी ने नफरत की हवा निकाल दी
प्रो. आरके जैन “अरिजीत”
राजनीति में नारे अक्सर हथियार बन जाते हैं, पर कभी-कभी वे जहरीले बनकर लोकतंत्र की धमनियों में उतरते हैं। राहुल गांधी ने लगातार 'मोहब्बत की दुकान' का नारा दोहराया। मोदी ने सीधे सवाल उठाया—यह कैसी मोहब्बत है जो मौत और खतरों का संदेश देती है? यह व्यक्तिगत विरोध नहीं, यह संवैधानिक और राष्ट्रीय अपमान है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि पिछले पच्चीस वर्षों में कितनी गालियाँ झेली, फिर भी विकास की गति रुकी नहीं। 140 करोड़ भारतीयों का विश्वास ही सरकार की असली शक्ति है, न कि किसी परिवार का रिमोट। यह तीखा संदेश सदन में गूंज गया और विपक्ष की आक्रोशित मुद्रा पर सन्नाटा छा गया।
कांग्रेस के लिए मानना कठिन था कि एक चायवाले का बेटा देश का प्रधानमंत्री बन गया। मोदी ने कहा—वे मान बैठे थे कि प्रधानमंत्री पद उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। जब जनता ने वह अधिकार छीन लिया, तो नफरत की आग भड़क उठी। 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' केवल नारा नहीं, यह उनके गहरे मन का सपना था। लोकतंत्र की बात करने वाले भी कभी-कभी मौत के नारे लगाते हैं। पीएम ने चेतावनी दी—इतिहास की कब्र उन्हीं के इंतजार में है। जनता सब देख रही है, समझ रही है। सदन में वॉकआउट हुआ, पर सच गूंजता रहा और हवा में लटक गया।
Read More भारत-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़ टैरिफ कटौती के पीछे बदलती वैश्विक राजनीति और भारत की बढ़ती ताकतमोदी ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ गिनाईं—आर्टिकल 370 हटाया, पूर्वोत्तर से आतंकवाद मिटाया, पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की, नक्सलवाद पर प्रहार किया। यही वजह थी कि नफरत और कब्र के नारे उठे। उन्होंने स्पष्ट कहा—कितने भी नारे लगाओ, मेरी कब्र नहीं खोदी जा सकती। माँ-बहनों का आशीर्वाद मेरी सबसे मज़बूत ढाल है। गरीबों को घर, शौचालय, बिजली, गैस और जल जीवन मिशन मिला। 25 करोड़ लोग गरीबी की जकड़न से मुक्त हुए। कांग्रेस ने परिवार के लिए देश को दांव पर लगाया, मैं जनता के लिए जीवन समर्पित कर रहा हूँ। फर्क इतना साफ था कि बहस का कोई स्थान नहीं बचा।
प्रधानमंत्री ने भाषण में देश की आर्थिक उड़ान को भी बखूबी रेखांकित किया। स्वतंत्रता के समय छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से फिसलकर ग्यारहवें स्थान पर पहुंची भारत, आज फिर से तीसरे नंबर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 'फ्रेजाइल फाइव' से 'विकसित भारत' की राह पर, उच्च विकास दर और कम मुद्रास्फीति के साथ दुनिया भारत की ओर आकर्षित हो रही है। यूरोपीय संघ (27 देशों के साथ 'मदर ऑफ ऑल डील्स') और अमेरिका जैसे बड़े समझौते, भविष्य-तैयार व्यापार सौदे—ये सब वैश्विक विश्वास की निशानी हैं। मोदी ने कहा—ये उपलब्धियां विपक्ष की नजर में नहीं आतीं, इसलिए वे नफरत के नारे लगाते हैं। लेकिन 140 करोड़ भारतीयों का आशीर्वाद, गरीबों-युवाओं की ताकत ही असली ढाल है। कांग्रेस ने देश को लूटा, मैंने जनता को सशक्त बनाया। यह फर्क इतना स्पष्ट है कि कोई बहस बाकी नहीं बचती। सदन में उनकी बातें विकास की नई गूंज बन गईं।
यह हमला केवल कांग्रेस पर नहीं, पूरे विपक्ष पर था। मोदी ने कहा—'मोहब्बत की दुकान' में आग लगी है, इसलिए कब्र के नारे उठते हैं। वे हार से जलते हैं। चुनाव हारने पर नफरत दोगुनी हो जाती है। जनता समझदार है, 140 करोड़ लोग मेरे साथ खड़े हैं। उनकी सरकार रिमोट से नहीं, जन-विश्वास से चलती है। मोदी ने मुस्कान के साथ कहा—रोज़ गालियाँ सुनता हूँ, पर स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। यह केवल हास्य नहीं था, यह अटूट आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का परिचायक था। सदन में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। विपक्ष चुप था; बहस का कोई अवसर नहीं बचा।
पीएम ने स्पष्ट संदेश दिया—नफरत से कुछ नहीं बनता। अगर 'मोहब्बत की दुकान' कब्र खोदने वाली बन जाए, तो वह दुकान बंद होनी चाहिए। देश विकास, एकता और प्रगति चाहता है, न कि नफरत। जो लोग 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' कहते हैं, वे खुद समय की कब्र में समा जाएंगे। जनता ने अपना निर्णय सुना दिया है। यह भाषण विपक्ष पर तीखा हमला और सरकार की उपलब्धियों का बयान था। मोदी ने साबित कर दिया—शब्द भी क्रांति ला सकते हैं। सदन खाली हुआ, लेकिन उनकी गूँज हवा में गूँजती रही और लोकतंत्र की चेतना में अमिट छाप छोड़ गई।
हर शब्द में तीव्रता थी, हर वाक्य में दृढ़ प्रतिबद्धता। यह केवल राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को जगाने का साहसिक प्रयास था। विपक्ष के नारे और झूठ कभी छिप नहीं सकते। मोदी ने साबित किया कि जनता के विश्वास और कामकाज का सामना किसी नफरत से नहीं किया जा सकता। यह भाषण इतिहास में दर्ज होगा, क्योंकि इसमें केवल जवाब नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का संदेश था। विकास और एकता की राह में नफरत की आग को बुझाने का प्रतीक बन गया।
सदन से बाहर लोग सोच में डूबे थे, हर मन में सवाल उठ रहा था—क्या लोकतंत्र की सुरक्षा इतनी मजबूत है? मोदी ने साबित किया कि लोकतंत्र केवल संविधान में नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और नेताओं की जिम्मेदारी में जीवित रहता है। 'मोहब्बत की दुकान' और 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' जैसे नारे इतिहास में चेतावनी बनकर हमेशा गूंजेंगे। यह भाषण वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश बन गया—नफरत से कुछ नहीं बनता। देश विकास, एकता और प्रगति चाहता है। जो लोग प्रधानमंत्री की कब्र की कामना करते हैं, वे समय की कब्र में समा जाएँगे। जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। मोदी ने साबित किया कि शब्द भी परिवर्तन ला सकते हैं। सदन खाली हुआ, पर उनकी गूँज लोकतंत्र की चेतना में अमिट छाप छोड़ गई।

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