कब्र के नारे, मोदी के मारे: विरोधियों की छुट्टी

नफरत के ज्वालामुखी पर विकास की बारिश, सदन में गरजती सच्चाई: मोदी ने नफरत की हवा निकाल दी

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 प्रो. आरके जैन “अरिजीत”

 फरवरी 2026 को राज्यसभा में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दियातो सदन में अचानक एक गहरा सन्नाटा छा गया। शोर-शराबे के बीच उनके भाषण ने विपक्ष पर तीखा हमला किया। यह भाषण केवल जवाब नहीं थायह इतिहास की आँख में आँख डालने जैसा थाछुपी नफरत का बेनकाब सामना। 'मोहब्बत की दुकानके मोहक शब्दों के पीछे छुपा जहर और 'मोदी तेरी कब्र खुदेगीकी कड़वी चेतावनी सीधे लोकतंत्र पर वार कर रही थी। मोदी ने मुखौटे को चीरते हुए स्पष्ट संदेश दिया—शब्दकर्म और नीयत कभी छिप नहीं सकते। विपक्ष की ताकत और आक्रोश उस क्षण थम गएऔर सदन ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना।

राजनीति में नारे अक्सर हथियार बन जाते हैंपर कभी-कभी वे जहरीले बनकर लोकतंत्र की धमनियों में उतरते हैं। राहुल गांधी ने लगातार 'मोहब्बत की दुकानका नारा दोहराया। मोदी ने सीधे सवाल उठाया—यह कैसी मोहब्बत है जो मौत और खतरों का संदेश देती हैयह व्यक्तिगत विरोध नहींयह संवैधानिक और राष्ट्रीय अपमान है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि पिछले पच्चीस वर्षों में कितनी गालियाँ झेलीफिर भी विकास की गति रुकी नहीं। 140 करोड़ भारतीयों का विश्वास ही सरकार की असली शक्ति हैन कि किसी परिवार का रिमोट। यह तीखा संदेश सदन में गूंज गया और विपक्ष की आक्रोशित मुद्रा पर सन्नाटा छा गया।

कांग्रेस के लिए मानना कठिन था कि एक चायवाले का बेटा देश का प्रधानमंत्री बन गया। मोदी ने कहा—वे मान बैठे थे कि प्रधानमंत्री पद उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। जब जनता ने वह अधिकार छीन लियातो नफरत की आग भड़क उठी। 'मोदी तेरी कब्र खुदेगीकेवल नारा नहींयह उनके गहरे मन का सपना था। लोकतंत्र की बात करने वाले भी कभी-कभी मौत के नारे लगाते हैं। पीएम ने चेतावनी दी—इतिहास की कब्र उन्हीं के इंतजार में है। जनता सब देख रही हैसमझ रही है। सदन में वॉकआउट हुआपर सच गूंजता रहा और हवा में लटक गया।

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मोदी ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ गिनाईं—आर्टिकल 370 हटायापूर्वोत्तर से आतंकवाद मिटायापाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक कीनक्सलवाद पर प्रहार किया। यही वजह थी कि नफरत और कब्र के नारे उठे। उन्होंने स्पष्ट कहा—कितने भी नारे लगाओमेरी कब्र नहीं खोदी जा सकती। माँ-बहनों का आशीर्वाद मेरी सबसे मज़बूत ढाल है। गरीबों को घरशौचालयबिजलीगैस और जल जीवन मिशन मिला। 25 करोड़ लोग गरीबी की जकड़न से मुक्त हुए। कांग्रेस ने परिवार के लिए देश को दांव पर लगायामैं जनता के लिए जीवन समर्पित कर रहा हूँ। फर्क इतना साफ था कि बहस का कोई स्थान नहीं बचा।

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प्रधानमंत्री ने भाषण में देश की आर्थिक उड़ान को भी बखूबी रेखांकित किया। स्वतंत्रता के समय छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से फिसलकर ग्यारहवें स्थान पर पहुंची भारतआज फिर से तीसरे नंबर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 'फ्रेजाइल फाइवसे 'विकसित भारतकी राह परउच्च विकास दर और कम मुद्रास्फीति के साथ दुनिया भारत की ओर आकर्षित हो रही है। यूरोपीय संघ (27 देशों के साथ 'मदर ऑफ ऑल डील्स') और अमेरिका जैसे बड़े समझौतेभविष्य-तैयार व्यापार सौदे—ये सब वैश्विक विश्वास की निशानी हैं। मोदी ने कहा—ये उपलब्धियां विपक्ष की नजर में नहीं आतींइसलिए वे नफरत के नारे लगाते हैं। लेकिन 140 करोड़ भारतीयों का आशीर्वादगरीबों-युवाओं की ताकत ही असली ढाल है। कांग्रेस ने देश को लूटामैंने जनता को सशक्त बनाया। यह फर्क इतना स्पष्ट है कि कोई बहस बाकी नहीं बचती। सदन में उनकी बातें विकास की नई गूंज बन गईं।

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यह हमला केवल कांग्रेस पर नहींपूरे विपक्ष पर था। मोदी ने कहा—'मोहब्बत की दुकानमें आग लगी हैइसलिए कब्र के नारे उठते हैं। वे हार से जलते हैं। चुनाव हारने पर नफरत दोगुनी हो जाती है। जनता समझदार है, 140 करोड़ लोग मेरे साथ खड़े हैं। उनकी सरकार रिमोट से नहींजन-विश्वास से चलती है। मोदी ने मुस्कान के साथ कहा—रोज़ गालियाँ सुनता हूँपर स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। यह केवल हास्य नहीं थायह अटूट आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का परिचायक था। सदन में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। विपक्ष चुप थाबहस का कोई अवसर नहीं बचा।

पीएम ने स्पष्ट संदेश दिया—नफरत से कुछ नहीं बनता। अगर 'मोहब्बत की दुकानकब्र खोदने वाली बन जाएतो वह दुकान बंद होनी चाहिए। देश विकासएकता और प्रगति चाहता हैन कि नफरत। जो लोग 'मोदी तेरी कब्र खुदेगीकहते हैंवे खुद समय की कब्र में समा जाएंगे। जनता ने अपना निर्णय सुना दिया है। यह भाषण विपक्ष पर तीखा हमला और सरकार की उपलब्धियों का बयान था। मोदी ने साबित कर दिया—शब्द भी क्रांति ला सकते हैं। सदन खाली हुआलेकिन उनकी गूँज हवा में गूँजती रही और लोकतंत्र की चेतना में अमिट छाप छोड़ गई।

हर शब्द में तीव्रता थीहर वाक्य में दृढ़ प्रतिबद्धता। यह केवल राजनीतिक हमला नहींबल्कि राष्ट्रीय चेतना को जगाने का साहसिक प्रयास था। विपक्ष के नारे और झूठ कभी छिप नहीं सकते। मोदी ने साबित किया कि जनता के विश्वास और कामकाज का सामना किसी नफरत से नहीं किया जा सकता। यह भाषण इतिहास में दर्ज होगाक्योंकि इसमें केवल जवाब नहींबल्कि राष्ट्र के भविष्य का संदेश था। विकास और एकता की राह में नफरत की आग को बुझाने का प्रतीक बन गया।

सदन से बाहर लोग सोच में डूबे थेहर मन में सवाल उठ रहा था—क्या लोकतंत्र की सुरक्षा इतनी मजबूत हैमोदी ने साबित किया कि लोकतंत्र केवल संविधान में नहींबल्कि जनता के विश्वास और नेताओं की जिम्मेदारी में जीवित रहता है। 'मोहब्बत की दुकानऔर 'मोदी तेरी कब्र खुदेगीजैसे नारे इतिहास में चेतावनी बनकर हमेशा गूंजेंगे। यह भाषण वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश बन गया—नफरत से कुछ नहीं बनता। देश विकासएकता और प्रगति चाहता है। जो लोग प्रधानमंत्री की कब्र की कामना करते हैंवे समय की कब्र में समा जाएँगे। जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। मोदी ने साबित किया कि शब्द भी परिवर्तन ला सकते हैं। सदन खाली हुआपर उनकी गूँज लोकतंत्र की चेतना में अमिट छाप छोड़ गई।

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