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कैंसर से लड़ाई अब सिर्फ़ शरीर की नहीं, मन की भी
कैंसर इलाज में नया मोड़: मन के इलाज से मजबूत हो रही जंग
साइको-ऑन्कोलॉजी” यानी कैंसर रोगियों के मनो-सामाजिक स्वास्थ्य पर पहचान और सहायता देने वाले क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
नई दिल्ली: विश्व भर में हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच-इलाज पर जोर देना और रोगियों के लिए बेहतर समर्थन व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। इसी कड़ी में इस बार विशेष रूप से “साइको-ऑन्कोलॉजी” यानी कैंसर रोगियों के मनो-सामाजिक स्वास्थ्य पर पहचान और सहायता देने वाले क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
कैंसर न केवल शारीरिक बीमारी है, बल्कि इसके परिणामस्वरूप रोगियों और उनके परिवारों पर भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक दबाव भी गहरा पड़ता है। पारंपरिक इलाज जैसे कि सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी बीमारी से लड़ने में मदद करते हैं, लेकिन उनका असर अक्सर व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देता है।
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज का असर सिर्फ़ शरीर तक सीमित नहीं रहता बल्कि तनाव, चिंता, डर, भावनात्मक अशांति और सामाजिक अलगाव जैसे मुद्दे भी सामने आते हैं। इन्हें प्रभावी रूप से संभालने में साइको-ऑन्कोलॉजी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जो कैंसर के रोगियों को मानसिक समर्थन, काउंसलिंग और भावनात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है।
Read More IAS Success Story: चार बार असफलता के बाद भी नहीं हारीं तृप्ति कल्हंस, 5वें प्रयास में बनीं IAS अफसर विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर से उबरने का सफर अलग-अलग लोगों के लिए अलग होता है और इसलिए मानसिक स्वास्थ्य पर भी अलग-अलग जरूरतें होती हैं। इसीलिए “साइको-ऑन्कोलॉजी” का मुख्य उद्देश्य रोगी-केंद्रित, समग्र और सहानुभूतिपूर्ण देखभाल प्रदान करना है ताकि मरीज न केवल बीमारी से, बल्कि उससे जुड़े मानसिक तनाव से भी बेहतर मुकाबला कर सकें।
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य संगठनों और अस्पतालों ने इस बात पर जोर दिया है कि केवल शारीरिक इलाज ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कैंसर रोगियों के मनो-भावनात्मक स्वास्थ्य और सामाजिक समर्थन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
इस दिन का संदेश यह है कि कैंसर से जुड़ी हर यात्रा अद्वितीय है और हर व्यक्ति को उसकी अनूठी जरूरतों के अनुसार सहायता मिलनी चाहिए। यही कारण है कि आज “साइको-ऑन्कोलॉजी” को कैंसर देखभाल का एक अविभाज्य हिस्सा माना जा रहा है।

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