राजनीति
मजदूरी कर परिवार पालने वाले विजय जायसवाल को कैंसर ने घेरा, टीम निशा बबलू सिंह बनी सहारा
कैंसर पीड़ित विजय जयसवाल की सहायता के लिए आगे आई टीम निशा बबलू सिंह मानवता की मिसाल
अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
जनपद सोनभद्र में सेवा और समर्पण की प्रतिमूर्ति बन चुकी टीम निशा बबलू सिंह ने एक बार फिर मानवता का फर्ज निभाते हुए समाज के सामने एक मिसाल पेश की है। पिपरी निवासी सीबू रिजवान द्वारा सोशल मीडिया पर अपने पड़ोसी की दयनीय स्थिति के बारे में साझा की गई मार्मिक पोस्ट का संज्ञान लेते हुए, टीम ने एक अत्यंत गरीब कैंसर पीड़ित परिवार की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। जानकारी के अनुसार पिपरी निवासी विजय जायसवाल (उम्र 58 वर्ष) एक स्थानीय होटल में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।
उन्हीं की मेहनत से उनकी पत्नी और दो बच्चों का पालन-पोषण हो रहा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था विजय जी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की चपेट में आ गए। आज, 3 फरवरी को जब टीम निशा बबलू सिंह के सदस्य उनके आवास पर पहुँचे, तो वहां का दृश्य अत्यंत हृदयविदारक था। बीमारी अब अपने अंतिम चरण पर पहुँच चुकी है और घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। पिता के बीमार होने से न केवल आय का स्रोत बंद हो गया है, बल्कि दोनों बच्चों के भविष्य और उनकी शादी को लेकर भी चिंता के बादल मंडरा रहे हैं।
विजय जायसवाल जी की शारीरिक वेदना और परिवार की लाचारी को देखते हुए टीम के सदस्यों ने बिना विलंब किए उन्हें तत्काल नकद आर्थिक सहायता प्रदान की। इस राशि से उनकी दवाइयां और जरूरी मेडिकल चेकअप सुनिश्चित कराए जाएंगे। टीम ने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया है कि 15 फरवरी के बाद उनके उपचार और बच्चों के सहयोग के लिए समिति सामूहिक रूप से हर संभव कदम उठाएगी। इस अवसर पर टीम के सदस्यों ने भावुक होते हुए कहा शास्त्रों में कहा गया है कि मानव जीवन 84 लाख योनियों के बाद बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है।
इस जीवन की सार्थकता तभी है जब हम हिंदू सनातन धर्म के मूल्यों का पालन करते हुए एक-दूसरे की पीड़ा को साझा करें। सेवा, समर्पण और त्याग ही हमारी समिति का मूल मंत्र है और एक इंसान का दूसरे के काम आना ही ईश्वर की सच्ची इबादत है। टीम निशा बबलू सिंह ने समाज के प्रबुद्ध, संपन्न और सक्षम नागरिकों से अपील की है कि वे विजय जायसवाल के उपचार और उनके बच्चों के भविष्य के लिए आगे आएं।कैंसर जैसी विकराल बीमारी से लड़ना किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं, इसमें पूरे समाज की एकजुटता और सहभागिता आवश्यक है।

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