यूजीसी के नये नियमांे को लेकर आक्रोशः मेधा ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

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बस्ती।
 
बस्ती जिले के भान पुर तहसील के उप जिलाधिकारीको यूजीसी के नये नियमांे को लेकर आक्रोश लगातार बढता जा रहा है। मंगलवार को मेधा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीनदयाल तिवारी के नेतृत्व में मेधा पदाधिकारियों, छात्रों और अधिवक्ताओं के साथ भानपुर के उप जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। मांग किया कि छात्रों के बीच जाति के आधार पर भेदभाव वाले नियमो को यूजीसी तत्काल वापस ले।
 
ज्ञापन देने के बाद दीनदयाल तिवारी ने कहा कि यूजीसी की नई गाइड लाइन छात्रों के लिए किसी वेदना से कम नहीं है। भारतीय संविधान में किसी भी अपराध के लिए सभी के लिए बराबर की सजा है तो फिर जातिगत कानून क्यों। नई गाइडलाइन के तहत शिकायत को ही प्राथमिक सत्य मानकर कार्रवाई करने की निति तय की गई है। गाइड लाइन में असत्य शिकायत पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं किया गया। यह कहां का न्याय है। छात्रों को जातिगत धारा में बांटना संविधान के बिलकुल विपरीत है।
 
जब भारतीय न्याय संहिता व विश्वविद्यालयों के आंतरिक अनुशासन नियम पहले से अस्तित्व में है तो फिर इस तरह का काला कानून क्यों। कहा कि यूजीसी के नये दिशा निर्देश को वापस नं लिया गया तो मेधा का चरणबद्ध आन्दोलन जारी रहेगा। बताया कि आगामी 30 जनवरी को बापू प्रतिमा के समक्ष मौन सत्याग्रह कर यूजीसी के भेदभाव उत्पन्न करने वाली गाइड लाइन को वापस किये जाने की मांग किया जायेगा। भानपुर के उप जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजने के दौरान मुख्य रूप से अधिवक्ता विनोद कुमार पाण्डेय, अंकेश पाण्डेय, उदय पाण्डेय, आशुतोष सिंह, सूर्यभान पाल, जितेन्द्र पाण्डेय, शनि पाण्डेय, लोकनाथ उपाध्याय, छोटू सिंह के साथ ही मेधा पदाधिकारी, कार्यकर्ता शामिल रहे।

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