दोष सिद्ध होने से पहले जमानत मिलना एक अधिकार - पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़
ब्यूरो प्रयागराज। उमर खालिद की जमानत को लेकर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि दोष सिद्ध होने से पहले जमानत मिलना एक अधिकार की तरह होना चाहिए। हालाँकि, उनके इस बयान पर ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं और सोशल मीडिया पर पूछा जा रहा है कि जब वह सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई थे तब भी उमर खालिद को जमानत नहीं मिली।
तो प्रशांत भूषण जैसे वकील यह सवाल क्यों उठा रहे हैं? क्या उमर खालिद को जमानत देने के मामले में ईमानदार कोशिश की गई? आख़िर उमर खालिद के साथ अब तक क्या हुआ है? इन सवालों के जवाब जानने से पहले यह जान लें कि आख़िर पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने क्या कहा है। चंद्रचूड़ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में एक कार्यक्रम में पत्रकार वीर सांघवी के सवाल का जवाब दे रहे थे। यह सवाल 2020 दिल्ली दंगों के साजिश मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने पर आधारित था। उमर खालिद पिछले पांच साल से जेल में हैं।
चंद्रचूड़ ने कहा, 'मैं अपनी अदालत की आलोचना करने में हिचकिचाता हूं, क्योंकि मैंने एक साल पहले ही इस संस्थान का नेतृत्व किया था। लेकिन ये सिद्धांत कहते हैं कि आप शर्तें लगा सकते हैं, लेकिन तेज ट्रायल सुनिश्चित करना चाहिए। अगर तेज ट्रायल संभव नहीं है तो जमानत नियम होनी चाहिए, अपवाद नहीं।'
चंद्रचूड़ ने कहा, 'मैं अब जज के रूप में नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में बोल रहा हूँ। यह दोष सिद्ध होने से पहले जमानत के अधिकार के बारे में है। हमारा कानून निर्दोष होने की धारणा पर आधारित है- हर आरोपी तब तक निर्दोष है, जब तक मुक़दमे में दोषी साबित न हो। ट्रायल से पहले जमानत सजा नहीं हो सकती। अगर कोई व्यक्ति पांच-सात साल जेल में रहता है और फिर बरी हो जाता है तो गँवाए हुए समय की भरपाई कैसे होगी?'

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