पक्षियों के मौलिक अधिकार पर विभिन्न विभागों का निशाना उनके मौलिक अधिकार पर डाल रहे डाका 

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नई दिल्ली, आधुनिकीकरण और शहरीकरण की अंधी दौड़ में इंसान जिस तेजी से पेड़ों की कटाई कर रहे हैं जिससे कारण पंक्षी विलुप्त हो रहे हैं, क्योंकि इससे उनके घर आवास नष्ट होते हैं। भोजन और प्रजनन के स्रोत कम होते हैं जिससे उसकी संख्या घट जाती है और कई प्रजातियां खतरे में पड़ जाती है,जैसा कि गौरैया जैसी चिड़िया के साथ हो रहा है,हाल ही में छत्तीसगढ़ में एक पेड़ काटने सौकडों पक्षियों की मौत का मामला भी सामने आया था, पेड़ पौधे पक्षियों के घोंसले बनाने और रहने की जगह होते हैं, कटाई से उनका घर छिन जाता है।
 
कई पंक्षी पेड़ों के फल,बीज या उन पर रहने वाले कीड़े खाते है, पेड़ों के बिना उनका भोजन खत्म हो जाता है।बढता प्रदूषण उसके स्वास्थ्य और जीवन पर असर डालता है। कुछ लोग अभी भी पंक्षियों का अवैध शिकार करते हैं या उन्हें पिंजरो में बेचते हैं , जिससे उनके प्राकृतिक अधिकार का हनन होता है। जबकि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला है कि पंक्षियों को भी सम्मान के साथ जीने का मौलिक अधिकार है और और उनके व्यापार या पिंजरों में कैद करना उनके अधिकारों का उलंघन है, पंक्षियों को दाना डालना कोई आधिकारिक घटना नहीं है, लेकिन यह एक अच्छा काम है जो पंक्षियों की मदद करता है।अगर आप निमित्त रुप से पंक्षियों को दाना डालते हैं, तो यह उनके लिए एक अच्छा भोजन स्रोंत बन सकता है, खासकर सर्दियों में जब भोजन की कमी होती है।
 
पेड़ पौधे कटाई, प्रदूषण और इंसानी दखल अंदाजी के कारण उनके आवास छिन रहे हैं । वहीं दिल्ली नगर निगम MCD कबूतरों को दाना डालने वाले जगहों पर प्रतिबन्ध लगा रखा है। इस फैसले से दाना बेचने वाले काफी नाराज़ हैं उनका कहना है कि उनके पेशे बंद हो गया है, और घर चलाना मुश्किल हो रहा है,जानकारों का मानना है कि कबूतरों को दाना खिलाने से घर में सुख शांति बनी रहती है, क्योंकि कबूतर शांति का प्रतीक माने जाते हैं। उन्हें भोजन देने से वैवाहिक जीवन में सुखी रहता है और दांपत्य जीवन में आने वाली सभी परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है। शास्त्रौं में पक्षियों को दाना और पानी अर्पित करना पुण्य कार्य माना गया है। सिर्फ उन्हें बचाने के लिए सख्त कानूनों और जागरुकता की जरूरत है।
 
बादल हुसैन 

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