आजाद भारत में गुलामी प्रथा नहीं चलेगी ,महिला शिक्षक संघ बरेली
बरेली। वृहस्पतिवार को जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी की अनिवार्यता संबंधी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले तथा राइट टू एजुकेशन अधिनियम, 2009 की धारा 23 में 2017 के संशोधन द्वारा थोपी गई व्यवस्था के विरुद्ध कड़ी आपत्ति जताई गई।
_यह फैसला आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य करने के विरुद्ध है, जो संवैधानिक सिद्धांतों एवं पूर्वव्यापी प्रभाव के सामान्य नियमों के प्रतिकूल है। कोई भी कानून और नियम परिवर्तन सामान्यत भविष्य की तिथियों से लागू नहीं किए जाते हैं।_
इससे उत्तर प्रदेश में लगभग दो लाख तथा देशभर में बीस लाख से अधिक शिक्षकों का भविष्य दांव पर है। निरंतर मानसिक दबाव से उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ रही है तथा समाज में नकारात्मक भावना व्याप्त हो रही है इस दौरान ।
जिलाध्यक्ष प्रवेश कुमारी यादव, महामंत्री राखी सक्सेना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, संगीता मित्तल,कोषाध्यक्ष नीतू अग्रवाल , मीडिया प्रभारी दीपाली सक्सेना, मोना सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष चंद्रा देवलिया,रचना सिंह,आरती सक्सेना नेहा गुप्ता, संतोष मिश्रा,सुमन माथुर,सूचि गुप्ता, आयुष बंसल, सीमा कपूर, एकता सक्सेना,सिंधु मेहरा,गायत्री यादव,रेनू गुप्ता,ज्योति गुप्ता, लक्ष्मी,अर्चना प्रियंका आदि सैकड़ों महिला शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।

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