फसल अवशेष (पराली) प्रबंधन को लेकर डीएम ने की बैठक

पराली जलाने से रोकने हेतु किसानों को करें जागरूक - डीएम

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अमेठी। जिलाधिकारी संजय चौहान ने  कलेक्ट्रेट सभागार में किसानों द्वारा पराली जलाए जाने के संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक किया। बैठक में उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि किसानों को पराली जलाने से रोकें एवं उन्हें पराली न जलाने हेतु जागरूक करें, तथा पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में उन्हें बताए। उन्होंने कहा कि लेखपालों व ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा भी लोगों को जागरूक किया जाए। इसके साथ ही धान क्रय केंद्रों पर बैनर के माध्यम से तथा ब्लॉक स्तर पर गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को जागरूक करें तथा पराली जलाने के नुकसान के बारे में बताएं।
 
बैठक में उपकृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा संचालित फसल अवशेष प्रबंधन योजना अंतर्गत विभिन्न प्रकार के यंत्रों को चिन्हित किया गया है जिस पर व्यक्तिगत कृषकों को 50% अनुदान तथा एफपीओ व पंजीकृत कृषक समितियों को फॉर्म मशीनरी बैंक की स्थापना हेतु यंत्र उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाना अनिवार्य है यह यंत्र कंबाइन हार्वेस्टर में अटैच किया जाता है जो कंबाइन द्वारा काटी गई फसल के अवशेष को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके खेत में बिखेर देता है।
 
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाया जाना एक दंडनीय अपराध है, यदि किसान द्वारा फसल अवशेष जलाए जाने की सूचना प्राप्त होती है तो 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए रुपए 2500, 02 से 05 एकड़ क्षेत्र के लिए रुपए 5000 और 05 एकड से अधिक क्षेत्र के लिए रुपए 15,000 तक पर्यावरण कंपनसेशन की वसूली की जाएगी। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि  कृषकों के खेत से पराली संग्रह कर निराश्रित गौशालाओं में रखा जाए, पराली का  गोशाला स्थल पर पशु के चारा व बिछौना के उपयोग में भी लाया जाएगा। बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी सचिन कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अर्पित गुप्ता, उप कृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी डॉ राजेश कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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