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जुगैल के आदिवासियों ने लेखपाल पर लगाया वसूली का आरोप, जिलाधिकारी से की शिकायत
ग्रामीणों ने लगाया लेखपाल पर वसूली करने का आरोप, ग्रामीण हलकान
ओबरा तहसील के जुगैल का मामला
अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
सोनभद/ उत्तर प्रदेश-
ओबरा तहसील के रेणुकापार के दूरस्थ क्षेत्र जुगैल ग्राम पंचायत के आदिवासी समुदाय ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्रीय लेखपाल ने उनसे 2006 में मिले पट्टे की जमीन की खतौनी (भूमि का अधिकार पत्र) देने के नाम पर मोटी रकम वसूल की है, लेकिन कई बार गुहार लगाने के बाद भी उन्हें खतौनी नहीं दी गई। जुगैल के चहला टोला में रहने वाले गरीब और अशिक्षित बैगा आदिवासी पिछले कई सालों से अपनी जमीन की खतौनी प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हाल ही में जब कुछ ग्रामीण लेखपाल के आवास पर गए,
ग्रामीणों के अनुसार, लेखपाल ने उन्हें खतौनी देने के लिए हजारों रुपये की मांग की और जब उन्होंने किसी तरह पैसे दिए भी, तो उन्हें खतौनी नहीं मिली। हाल ही में जब कुछ ग्रामीण लेखपाल के आवास पर गए, तो उन्हें बताया गया कि खतौनी में नाम चढ़ाने और उसे ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें और पैसे देने होंगे।
Read More अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कानपुर के ग्रीन पार्क में लोगों ने बड़ी संख्या में किया योगाभ्यासगरीबी और शोषण से तंग आकर जुगैल के दर्जनों आदिवासी ग्रामीणों ने सोनभद्र मुख्यालय जाकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अपनी खतौनी में नाम दर्ज कराने और लेखपाल द्वारा ली गई अवैध रकम को वापस दिलाने की मांग की।
ज्ञापन देने वालों में राजाराम, राम प्रसाद, बासदेव, और बबलू जैसे कई ग्रामीण शामिल थे।जनपद के संवेदनशील जिलाधिकारी ने आदिवासियों की व्यथा को गंभीरता से सुना और तुरंत कार्रवाई का निर्देश देते हुए उप जिलाधिकारी ओबरा को मामले की निष्पक्ष जांच करने को कहा।यह घटना सोनभद्र जैसे पिछड़े और आदिवासी बहुल जिले में भ्रष्टाचार की एक बानगी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ओबरा तहसील में कुछ ऐसे अधिकारी बैठे हैं जो बिना पैसे लिए कोई काम नहीं करते, जिससे गरीब और वंचित जनता को भारी परेशानी हो रही है।
Read More बकरी पालन व्यवसाय ग्रामीणोंके आय का सबसे अच्छा साधन साबित हो रहा है।-डॉ. मणि शंकर द्विवेदीग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आकांक्षी जनपद के सपने को साकार करने के लिए उप जिलाधिकारी ओबरा से इस घटना की गहन जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की है ताकि शोषित आदिवासियों को न्याय मिल सके।यह मामला दिखाता है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को भी निचले स्तर पर बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा कैसे प्रभावित किया जा रहा है। अब सबकी नजरें उप जिलाधिकारी ओबरा की कार्रवाई पर टिकी है।


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