ग्राम सभा की सार्वजनिक भूमि पर कब्जा

नए BNS के दिशानिर्देशों की अनदेखी, प्रशासन की लापरवाही उजागर

ग्राम सभा की सार्वजनिक भूमि पर कब्जा

 

अम्बेकरनगर।

ग्राम सभा अरई (चुरैला) के गाटा संख्या 1309 (खाद गड्ढा की भूमि) पर दबंग तत्वों द्वारा अवैध निर्माण का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, यह भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित है, लेकिन प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा इस पर पक्का निर्माण कर लिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद तहसील और जिला प्रशासन ने इस मामले पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

नए BNS (भूमि निगरानी सिस्टम) के बावजूद लापरवाही

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भारत सरकार द्वारा भूमि विवादों और अतिक्रमण रोकने के लिए हाल ही में भूमि निगरानी सिस्टम (BNS) लागू किया गया है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भूमि की स्थिति की निगरानी और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है। इसके तहत सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण की तुरंत पहचान और निस्तारण के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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हालांकि, इस मामले में BNS के दिशानिर्देशों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर बार-बार शिकायतें करने के बावजूद लेखपाल द्वारा फर्जी रिपोर्ट लगाई गई, जिसमें यह दावा किया गया कि मौके पर कोई निर्माण नहीं है। जबकि वास्तविकता में दबंगों द्वारा निर्माण कार्य जारी है।

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प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल

नए BNS के तहत शिकायत मिलने पर भूमि का डिजिटल सत्यापन, मौके की जियो-टैग्ड तस्वीरें, और त्वरित कार्रवाई अनिवार्य है। लेकिन इस प्रकरण में तहसील और जिला प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों की मांग: तत्काल कार्रवाई हो

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नए BNS के तहत भूमि का सटीक सत्यापन कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, मुख्यमंत्री पोर्टल पर फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले लेखपाल घनश्याम वर्मा और अन्य संबंधित अधिकारियों की जांच कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

विशेषज्ञों की राय

भूमि विशेषज्ञों का कहना है कि BNS जैसे प्रभावी सिस्टम के बावजूद ऐसे मामलों में कार्रवाई न होना प्रशासनिक तंत्र की खामियों को उजागर करता है। यदि इस प्रकार के मामलों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो सार्वजनिक भूमि का दुरुपयोग बढ़ता रहेगा।

                      

 


ग्राम सभा अरई (चुरैला) का यह मामला नए BNS की विफलता और प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर उदाहरण है। इस प्रकरण में अब देखना  यह है कि जिला प्रशासन मामले को कितना संज्ञान लेता है? 
क्या जिला अधिकारी इस प्रकरण में लापरवाही और उदासीनता के खिलाफ सख्त कार्यवाही करेंगे? 
जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन के कार्य प्रणाली से ग्रामीण अभी तक पूर्णतया असंतुष्ट हैं।

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