लड़कियां रोटी रहीं फ़िर भी नहीं पसीजा लखनऊ प्रशासन

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अलीगंज स्थित श्री राम औद्योगिक अनाथालय से 9 लड़कियां बाथरूम की जाली काटकर भागी थी। जिनमें से 2 लड़कियों को पुरनिया चौराहे पर पकड़ा गया उस समय वो बस का इंतज़ार कर रहीं थी। मामला आगे बढ़ा तो लखनऊ के डीएम सूर्यपाल गंगवार ने इस पर कड़ा एक्शन लिया और  अनाथालय   को खाली कराने के लिए निर्देशित किया उस वक्त अनाथालय में 37 लड़कियां मौजूद थी।इस फैसले का काफ़ी विरोध हुआ। विरोध अनाथालय की शेष लड़कियां ही कर रहीं थी।
 
कल शाम पांच बजे जब प्रोबेशन बिभाग के 4 से 5 अधिकारी तीन छोटी मझोली गाडियां लेकर  संस्था में आए और लड़कियों को गाड़ी में बैठने के लिए कहने लगे। इसको सुनते ही जो लड़की जहां थी वहीं से रोने चिल्लाने  लगी कि हम कहीं नहीं जाएंगे, यहीं रहेंगे। कुछ देर के बाद प्रोवेशन के कर्मचारियों ने पुलिस को सम्पर्क किया।
लड़कियां अनाथालय से न जाने का भरसक प्रयास किया रोई, गिड़गिड़ाई लेकिन प्रशाशन ने उनकी एक न सुनी।
 
जबरन महिला  पुलिस बल के साथ उन्हें गाड़ियों में भरकर रातों रात सरकारी संरक्षण गृह में भेज दिया गया। वहीं अनाथालय के संचालक ओम प्रकाश पाठक का कहना है कि जैसे ही प्रशासन लड़कियों को सरकारी संरक्षण गृह  जाने के लिए बोले तुरंत ही लड़कियां चिल्ला चिल्लाकर कर रोने लगी फ़िर  महिला सिपाही को बुलाया गया जिन्होंने आकर आनन -फानन में मारपीट कर गाड़ी में जबरदस्ती भर कर राजकीय बाल गृह बालिका पारा ले गईं।

सवाल उठता है कि लंबे समय से बेहतरीन और बिना किसी दाग के चल रहे श्री राम औद्योगिक अनाथालय पर शासन द्वारा जल्दबाजी में  इतनी शख्ती क्यों की गई?

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