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भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को लेकर जिलाधिकारी सख्त, पंचायत सहायकों से कराई जाएगी ऑनलाइन फीडिंग

खसरा मूल्यांकन एवं कम्प्यूटरीकरण कार्य की समीक्षा हेतु जिलाधिकारी ने की ऑनलाइन बैठक, समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण करने के दिए निर्देश

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राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र / उत्तर प्रदेश -

जनपद में भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण, खसरा मूल्यांकन एवं डिजिटलीकरण की महत्वाकांक्षी प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने समस्त तहसीलों के उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों, राजस्व अधिकारियों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक की। बैठक में भूमि अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण, ऑनलाइन डाटा फीडिंग, जीआईएस मैपिंग एवं भूमि वर्गीकरण के कार्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि बदलते समय के साथ भूमि अभिलेखों का डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी, बल्कि आमजन को भी भूमि संबंधी सूचनाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि जनपद के सभी गांवों के खसरा नंबरों का तहसीलवार एवं ग्रामवार डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाए, जिससे भूमि अभिलेखों का सुव्यवस्थित एवं स्थायी रिकॉर्ड तैयार हो सके।

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बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विशेष रूप से निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात पंचायत सहायकों के माध्यम से ऑनलाइन फीडिंग का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। उन्होंने कहा कि पंचायत सहायकों की सहभागिता से ग्राम स्तर पर उपलब्ध अभिलेखों का संकलन, सत्यापन एवं ऑनलाइन अपलोडिंग का कार्य तेजी से पूरा किया जा सकेगा। साथ ही उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि इस कार्य की नियमित निगरानी कर प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।

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जिलाधिकारी ने कहा कि परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक खसरा संख्या का वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार पर वर्गीकरण किया जाएगा। इसके तहत भूमि की स्थिति, सड़क संपर्क, सड़क की चौड़ाई, सड़क की श्रेणी तथा आवासीय क्षेत्रों से दूरी जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को डिजिटल डाटाबेस में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीआईएस एवं सैटेलाइट तकनीक के उपयोग से प्रत्येक भूखंड की सटीक स्थिति चिन्हित की जाएगी, जिससे भूमि संबंधी सूचनाओं की विश्वसनीयता और उपयोगिता में वृद्धि होगी।

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बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि सड़कों का वर्गीकरण उनकी चौड़ाई एवं श्रेणी के आधार पर किया जाएगा। वहीं खसरों का विश्लेषण मुख्य सड़क एवं आबादी क्षेत्र से दूरी के आधार पर भी किया जाएगा, जिससे विकास परियोजनाओं, औद्योगिक निवेश, आवासीय योजनाओं एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान आसानी से की जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनपद के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इससे निवेशकों को उपयुक्त भूमि की जानकारी सरलता से उपलब्ध होगी, विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी तथा भूमि संबंधी विवादों के निस्तारण में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, खसरा टैगिंग, जीआईएस मैपिंग, सड़क वर्गीकरण एवं दूरी विश्लेषण जैसे सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। साथ ही पुराने अभिलेखों के डिजिटलीकरण, सीमांकन संबंधी समस्याओं एवं विभागीय समन्वय जैसी चुनौतियों का समाधान आपसी सहयोग एवं तकनीकी संसाधनों के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी  चर्चित गौड़ ने विश्वास व्यक्त किया कि खसरा अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण एवं ऑनलाइन डाटा प्रबंधन प्रणाली जनपद सोनभद्र में भूमि प्रशासन को अधिक पारदर्शी, आधुनिक, जवाबदेह एवं जनहितैषी बनाएगी तथा भविष्य में निवेश, औद्योगिक विकास एवं आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए मजबूत आधार तैयार करेगी।

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