साहब, अंडा खिलाया तो बच्चे हो जाते है सेंसल्स

भ्रष्टाचार छिपाने को सेविका ने बताया नया विज्ञान

BIHAR SWATANTRA PRABHAT Picture
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सेविका ने सरकारी मीनू को दिखाया ठेंगा

स्वतंत्र प्रभात | पटना , बिहार ब्यूरो
प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश


सरकार एक तरफ बच्चों के कुपोषण को मिटाने के लिए प्रतिमाह करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर जिम्मेदारी वाले जिम्मेदार लोग ही अंधविश्वास और लापरवाही की चादर ओढ़कर बैठे हैं। ताजा रोचक मामला त्रिवेणीगंज प्रखंड के दपरखा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-64 का है, जहाँ व्यवस्था सुधारने के बजाय उसे 'सेंसलेस' जैसे अजीब तर्कों की भेंट चढ़ाया जा रहा है। प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद कितना चुस्त दुरुस्त है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अधिकारी एक चांस देने की बात कर रहे हैं।

बरामदे में सिमटा बचपन, रजिस्टर में ही पोषण!

दपरखा कोशी कॉलनी चौक स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 64 की बदहाली साफ नजर आई। केंद्र किसी सुरक्षित भवन के बजाय एक खुले बरामदे पर संचालित हो रहा था।बुधवार को कुल 40 नामांकित बच्चों की तुलना में केवल 26 बच्चे उपस्थित मिले। सरकारी मीनू के अनुसार बच्चों को अंडा मिलना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ बच्चों को इससे वंचित रखा जा रहा है।

सेविका का 'अजूबा' तर्क

जब केंद्र की सेविका मंजू देवी से बच्चों को अंडा न देने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने स्वास्थ्य विज्ञान को किनारे रखते हुए एक हैरान करने वाला तर्क दिया। सेविका का कहना था कि "अंडा खाने से बच्चों को सेंसेल्स (Senseless) हो जाता है।एक जिम्मेदार पद पर बैठी महिला द्वारा दिया गया यह तर्क न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह विभाग की ट्रेनिंग और जागरूकता पर भी करारा तमाचा है।

जिम्मेदार बोले- "माफ कर दीजिए, एक चांस दीजिए"

इस गड़बड़ी पर जब विभागीय अधिकारियों से सवाल किया गया, तो जवाब और भी निराशाजनक था। एलएस बबिता कुमारी ने अपनी विफलता स्वीकारते हुए कहा, "माफ कर दीजिए, एक चांस दीजिए।हम समझा देंगे । किसी केंद्र पर अंडा नहीं दिया जाता है।" एक निरीक्षी अधिकारी का यह स्वीकारोक्ति कि कहीं भी मीनू का पालन नहीं हो रहा, पूरे सिस्टम की पोल खोल देता है। सुलगते सवाल

समाज कल्याण बिभाग ने बर्षो पूर्व भवनहीन आंगनबाड़ी केंद्र को बगल के स्कूल भवन में शिफ्ट करने का आदेश था,आदेश के बाद कई केंद बगल के सरकारी स्कूलों में शिफ्ट हुए,।लेकिन बगल में स्कूल रहने के बाद भी इस केंद्र को क्यो शिफ्ट नही किया गया, इस दरियादिली का जवाब बिभाग के पास नहीं है।

लेकिन त्रिवेणीगंज की यह तस्वीर बताती है कि बच्चों का पोषण आहार आज भी कागजी खानापूर्ति और अफसरों की मिलीभगत की भेंट चढ़ रहा है।

सीडीपीओ पूजा कुमारी ने बताया कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।



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