स्कूलों में खेल मैदान का है घोर अभाव

खेलो इंडिया’ की रफ्तार पड़ रही धीमी

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खेल मैदान नहीं होने से बच्चों को हो रही परेशानी,सर्वांगीण विकास के दावों पर उठ रहे सवाल

स्वतंत्र प्रभात | सुपौल से जिला ब्यूरो मनोज रोशन की रिपोर्ट
प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश
 

सुपौल जिले  क्षेत्र के अधिकांश सरकारी एवं निजी विद्यालयों में खेल मैदान का अभाव अब एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इसका सीधा असर बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास पर पड़ रहा है। सरकार द्वारा ‘खेलो इंडिया’ जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों के जरिए खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।त्रिबेनीगंज अनुमंडल मुख्यालय स्थित कन्या विद्यालय, प्राइमरी स्कूल मकतब, रामजी दास मध्य विद्यालय, प्राइमरी स्कूल प्रखंड हाता, प्लस टू गर्ल्स स्कूल समेत करीब 300 से अधिक प्रारंभिक विद्यालयों में खेलकूद के लिए पर्याप्त मैदान और संसाधनों का अभाव है। कई विद्यालयों में तो खेल मैदान नाम मात्र का भी नहीं है, जिससे बच्चों को खुले में खेल पाने का अवसर नहीं मिल पा रहा।


नगर परिषद क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पतरघटी और सुभाष कन्या मध्य विद्यालय में खेल मैदान नहीं होने के कारण बच्चे सड़कों या संकरे स्थानों पर खेलने को मजबूर हैं, जो न केवल असुरक्षित है बल्कि बच्चों के खेल के उत्साह को भी प्रभावित करता है।वहीं मकतब मदरसा और राजकीय मध्य विद्यालय श्रीपुर बिशनपुर जैसे कई विद्यालयों में खेल मैदान की कोई व्यवस्था ही नहीं है।अधिकांश उत्क्रमित हाई स्कूल एवं प्लस टू विद्यालयों में भी सीमित संसाधनों के बीच किसी तरह खेल गतिविधियां संचालित की जाती हैं। खेल सामग्री की कमी, प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षकों का अभाव और उचित मैदान नहीं होने से छात्र-छात्राओं को समुचित खेल प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। कई स्कूलों में शारिरिक  शिक्षक पदस्थापित  है।लेकिन ये शारीरिक शिक्षक भी संसाधनों के अभाव में निष्क्रिय होकर समय बिताने को मजबूर हैं।खासकर 2005 /2006 में खुले नवसृजित प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति और भी चिंताजनक है। इन विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, यहां तक कि कई स्कूलों तक पहुंचना भी बच्चों के लिए कठिन होता है। नामांकन संख्या सैकड़ों में होने के बावजूद खेलकूद के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही संसाधन।

कहते हैं लोग

स्थानीय समाजसेवी डॉ. इंद्रभूषण प्रसाद, संतोष कुमार ‘पप्पू’, दीपनारायण यादव, विनय कुमार, आदि का कहना है कि खेलकूद बच्चों के सर्वांगीण विकास का अहम हिस्सा है। खेल न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता भी विकसित करता है। आज तो खेल भी बड़ा केरियर बन गया है।लेकिन खेल  मैदान के अभाव में बच्चों का यह विकास बाधित हो रहा है, जो भविष्य के लिए चिंताजनक है।
  वही अभिभावकों का भी कहना है कि विद्यालयों में केवल किताबों तक सीमित शिक्षा पर्याप्त नहीं है। यदि बच्चों को सही मायने में विकसित करना है तो खेलकूद की समुचित व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि प्रत्येक विद्यालय में खेल मैदान और आवश्यक खेल संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।खेल सुविधाओं के अभाव को दूर करने के लिए ठोस पहल नहीं हुई तो ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों का उद्देश्य अधूरा रह सकता है

अधिकारियों का पक्ष

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प्रभारी बीईओ मनीष कुमार मीनू ने बताया कि जहां-जहां खेल मैदान की कमी है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग स्तर पर प्रस्ताव भेजा गया है और भविष्य में विद्यालयों में खेल मैदान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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