बोर्ड परीक्षा पूरी कहानी नहीं, जीवन का केवल एक अध्याय है

हर बच्चा नंबरों से नहीं, अपने हुनर से बड़ा बनता है, बोर्ड परीक्षा में हारकर भी जीवन की सबसे बड़ी जीत संभव है

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बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने वाले हैं। तारीख करीब आते ही हजारों घरों में बेचैनी बढ़ने लगती है। कहीं विद्यार्थी देर रात तक जागकर अपने अनुमान लगा रहा हैतो कहीं माता-पिता चुपचाप उसके चेहरे की चिंता पढ़ रहे हैं। किसी को अच्छे अंकों की उम्मीद हैकिसी को डर कि मेहनत के बाद भी परिणाम मनचाहा न आए। परिणाम के दिन मोबाइल की घंटीवेबसाइट का खुलनारोल नंबर डालती काँपती उंगलियाँ—सब उस पल को और भारी कर देते हैं। और जब स्क्रीन पर अंक उम्मीद से कम दिखें या असफलता सामने खड़ी मिलेतो लगता है मानो सब समाप्त हो गया। विद्यार्थी को भविष्य अंधेरा दिखने लगता हैअभिभावक चिंता और अपराधबोध से भर उठते हैं। लेकिन इसी क्षण सबसे जरूरी है यह याद रखना कि यह केवल एक परीक्षा हैपूरा जीवन नहीं। एक परिणाम आपके व्यक्तित्वक्षमता और भविष्य का अंतिम निर्णय नहीं हो सकता।

सबसे पहले विद्यार्थी और अभिभावकदोनों को अपनी भावनाएँ दबाने के बजाय उन्हें स्वीकार करना चाहिए। निराशादुखगुस्साआँसू या चुप्पी—ये सब स्वाभाविक हैं। विद्यार्थी यदि रोना चाहता हैतो उसे रो लेने देंयदि कुछ देर अकेला रहना चाहता हैतो उसे समय दें। उसी तरह अभिभावक भी अपनी चिंता छिपाने के लिए कठोर न बनें। इस समय सबसे बड़ी जरूरत साथ की होती है। बच्चे के पास बैठकर केवल इतना कहना—“हम तुम्हारे साथ हैंयह अंत नहीं है”—उसके टूटे मन को संभाल सकता है। कई बार लंबे भाषण नहींबल्कि एक शांत स्पर्शएक गले लगाना और बिना निर्णय उसकी बात सुन लेना सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

अभिभावकों को विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि वे तुलना और तानों से पूरी तरह बचें। “फलाँ के इतने अंक आएतुम्हारे क्यों नहीं?” या “इतना खर्च कियाफिर भी क्या हुआ?” जैसे वाक्य बच्चे के मन पर गहरे घाव छोड़ते हैं। असफलता के बाद विद्यार्थी पहले ही अपराधबोध और शर्म से भरा होता है। यदि घर में भी उसे केवल आलोचना मिलेतो उसका आत्मविश्वास और टूट जाता है। इस समय बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि उसका महत्व केवल अंकों से नहीं है। वह एक इंसान हैजिसके भीतर योग्यताएँभावनाएँरुचियाँ और सपने हैं। घर का वातावरण शांतभरोसे से भरा और सकारात्मक रखना ही इस कठिन समय में अभिभावक का सबसे बड़ा कर्तव्य है।

विद्यार्थियों को यह समझना होगा कि असफलता का अर्थ अयोग्यता नहीं होता। कई बार कम अंकों के पीछे अनेक कारण होते हैं—तनावसमय प्रबंधन की कमीसही रणनीति का अभावस्वास्थ्य की समस्या या किसी विषय में कमजोरी। इसलिए स्वयं को “मैं किसी काम का नहीं” कहकर दोषी ठहराने के बजाय अपनी तैयारी का ईमानदारी से विश्लेषण करें। सोचेंकमी कहाँ रह गई और अगली बार क्या बदला जा सकता है। यदि कोई विषय कठिन लगातो उसका अधिक अभ्यास करें। यदि समय कम पड़ातो समय बाँटने की आदत डालें। यदि तनाव ने असर डालातो पढ़ाई के साथ विश्रामव्यायाम और ध्यान को भी जीवन का हिस्सा बनाइए। हर गलती अगली सफलता का रास्ता दिखाती है।

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असफल परिणाम के बाद आगे बढ़ने के अनेक रास्ते होते हैं। यदि किसी विषय में कम अंक आए हैंतो कंपार्टमेंट या सुधार परीक्षा दी जा सकती है। यदि पूरी परीक्षा में सफलता नहीं मिलीतो अगले वर्ष बेहतर तैयारी के साथ फिर प्रयास किया जा सकता है। आज शिक्षा की दुनिया पहले से कहीं अधिक खुली है। केवल एक धारा या एक करियर ही जीवन का अंतिम रास्ता नहीं है। विज्ञानवाणिज्य और कला के अलावा भी अनेक विकल्प हैं—डिजिटल मार्केटिंगडिजाइनहोटल प्रबंधनएनीमेशनखेलसंगीतकंप्यूटरफोटोग्राफीफैशनआईटीआईडिप्लोमाउद्यमिता और कई कौशल आधारित क्षेत्र। कई बार एक असफलता हमें उसी दिशा में मोड़ देती हैजहाँ हमारी वास्तविक प्रतिभा छिपी होती है।

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अभिभावकों को चाहिए कि वे इस समय बच्चे की रुचियों को समझने की कोशिश करें। हर बच्चा डॉक्टरइंजीनियर या सरकारी अधिकारी बनने के लिए नहीं बना होता। कोई चित्रकला में अच्छा होता हैकोई खेल मेंकोई लेखन मेंतो कोई तकनीक या व्यवसाय में। यदि बच्चा किसी अलग क्षेत्र में रुचि दिखाता हैतो उसे कमजोरी नहींसंभावना समझें। आवश्यकता हो तो करियर काउंसलरशिक्षक या अनुभवी व्यक्ति की सहायता लें। कई लोग स्कूल या बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक नहीं ला पाएलेकिन बाद में अपनी लगन और कौशल के बल पर बड़ी सफलता तक पहुँचे। इसलिए बच्चे को यह महसूस कराइए कि उसका भविष्य अब भी सुरक्षित है और उसके सपनों के लिए घर का दरवाज़ा आज भी खुला है।

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विद्यार्थियों को इस समय अकेलेपन से बचना चाहिए। अक्सर असफलता के बाद वे मित्रोंरिश्तेदारों और दुनिया से दूर होने लगते हैं। उन्हें लगता है कि लोग उनका मज़ाक उड़ाएँगे या उन्हें कम समझेंगे। लेकिन सच यह है कि जो लोग सचमुच अपने होते हैंवे साथ खड़े रहते हैं। अपने किसी भरोसेमंद मित्रशिक्षकभाई-बहन या माता-पिता से खुलकर बात कीजिए। मन का बोझ भीतर मत रखिए। साथ हीसोशल मीडिया और दूसरों की सफलता देखकर स्वयं को कम मत आँकिए। हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है। कुछ लोग जल्दी सफल होते हैंकुछ देर सेलेकिन आगे वही बढ़ते हैंजो हार के बाद भी चलना नहीं छोड़ते।

जब सब कुछ बिखरा हुआ लगेतब केवल एक बात याद रखिए—बोर्ड परीक्षा जीवन की पूरी कहानी नहींउसका केवल एक छोटा-सा अध्याय है। यदि आज असफलता मिली हैतो इसका अर्थ यह नहीं कि कल सफलता नहीं मिलेगी। यह समय स्वयं को समाप्त मान लेने का नहींबल्कि नए ढंग से फिर शुरू करने का है। अभिभावक धैर्य रखें और विद्यार्थी हिम्मत बनाए रखेतो यह कठिन दौर भी बीत जाएगा। आज का दुख कल की ताकत बन सकता हैआज की हार कल की सबसे बड़ी सीख। गिरना गलत नहीं हैगिरकर वहीं रुक जाना गलत है। इसलिए उठिएस्वयं पर विश्वास रखिए और आगे बढ़िए—क्योंकि जीवन अब भी आपके सामने पूरी रोशनी के साथ खड़ा है।

कृति आरके जैन

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