राजा परीक्षित जन्म कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

क्षेत्र के छमनीखेड़ा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन भक्ति और आस्था का अद्भुत माहौल देखने को मिला।

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लालगंज (रायबरेली)।
 
क्षेत्र के छमनीखेड़ा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन भक्ति और आस्था का अद्भुत माहौल देखने को मिला। नैमिषारण्य तीर्थ से पधारे कथा व्यास पंडित बृजनंदन शास्त्री ने राजा परीक्षित के जन्म की मार्मिक कथा सुनाई। उनके भावपूर्ण शब्दों ने श्रोताओं को गहराई तक छू लिया। कथा प्रसंग सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। कथा व्यास ने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भीष्म पितामह बाणों की शैया पर लेटे थे।
 
उनके शरीर से रक्त बह चुका था। युद्ध समाप्त होने के बाद पांडव उनसे मिलने पहुंचे। भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन से संवाद के बाद भीष्म पितामह ने देह त्याग दी। उसी समय अर्जुन के धनुष से मां गंगा का प्रादुर्भाव हुआ। उन्होंने आगे कहा कि भीष्म पितामह के पंचतत्व में विलीन होने पर पांडव शोक में डूब गए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी प्राणी के जाने पर विलाप नहीं करना चाहिए। ऐसे समय में संकीर्तन और गरुड़ पुराण का श्रवण करना चाहिए। यही सच्चा मार्ग है। कथा के दौरान राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग भी सुनाया गया। महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारका लौटे।
 
इसी बीच अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की पत्नी ने एक बालक को जन्म दिया। पांडवों ने उसका नाम विष्णुरात रखा। बाद में वही बालक परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कथा के इस प्रसंग ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान ऋतुराज सिंह, प्रोफेसर आरके सिंह, केशव प्रसाद तिवारी, संजय तिवारी, बच्चू दीक्षित, बेटऊनू भैया, आनंद तिवारी, सत्यम त्रिपाठी, झब्बू भैया, गोलू, शिवम, रज्जन तिवारी, संदीप तिवारी, धनंजय, शंकरजी, लल्लन, बच्चाबाबू, नयन, रतन तिवारी, मदन, रिंकू, राहुल, सूरज तिवारी, दुर्गाशंकर तिवारी, बसंत तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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