कोन बेचू वीर धाम मेला सकुशल संपन्न, हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना बेचू वीर धाम

वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ा यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और आपसी भाईचारे की मिसाल भी बन चुका है।

राजेश तिवारी Picture
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स्वतंत्र प्रभात संवाददाता

कोन /सोनभद्र-

जनपद के  कोन थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मिश्री स्थित प्रसिद्ध बेचू वीर धाम का ऐतिहासिक एवं आस्था का प्रतीक मेला दिनांक 29 मार्च 2026 को रात्रि 12:00 बजे विधिवत रूप से संपन्न हो गया। चैत मास के पावन अवसर पर रामनवमी से प्रारंभ हुआ यह मेला एकादशी तक लगातार चलता रहा, जिसमें प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दर्शन-पूजन किया और अपनी मनोकामनाएं मांगीं।

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मेले के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा। दूर-दराज के गांवों के साथ-साथ अन्य जनपदों एवं राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। श्रद्धालुओं ने बेचू वीर बाबा के दरबार में मत्था टेककर सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य पूरी होती है, जिसके कारण इस धाम के प्रति लोगों की गहरी आस्था और विश्वास बना हुआ है।

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स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इस धाम पर विशेष रूप से ऐसे दंपत्ति और परिवार बड़ी संख्या में आते हैं जिनके संतान नहीं होती। लोग यहां आकर बाबा से संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि बाबा की कृपा से कई निःसंतान दंपत्तियों की मनोकामना पूरी हुई है, जिसके बाद वे दोबारा यहां आकर पूजा-अर्चना और भंडारा करते हैं। इसी मान्यता के कारण इस धाम की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।

मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ पारंपरिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। जगह-जगह भजन-कीर्तन, जागरण, ढोल-नगाड़े और लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। रात भर श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते रहे और बाबा के जयकारों से पूरा मेला परिसर गूंजता रहा। मेले में बच्चों और युवाओं के लिए झूले, खिलौने, मिठाई, चाट, पकौड़ी, खिलौना दुकानों सहित विभिन्न प्रकार की अस्थायी दुकानें लगी रहीं, जिससे मेले की रौनक और बढ़ गई। ग्रामीण संस्कृति और परंपरा की झलक मेले में साफ देखने को मिली।इसी क्रम में

बेचू वीर धाम परिसर में स्थित बरही माई का मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। मेले में आने वाले श्रद्धालु बेचू वीर बाबा के दर्शन के साथ-साथ बरही माई मंदिर में भी पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि बरही माई माता की पूजा करने से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की रक्षा होती है। मेले के दौरान यहां भी दिनभर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।

मेले के दौरान विशेष पूजा-अर्चना, हवन-पूजन और भंडारे का आयोजन किया गया। अंतिम दिन रात्रि में विशेष पूजा के बाद गाजे-बाजे के साथ पुनः बाबा की पूजा-अर्चना कर मेला समापन की घोषणा की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी श्रद्धा और मेहनत की कमाई चढ़ाकर बाबा से आशीर्वाद लिया और अगले मेले में पुनः आने की कामना की।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि यह मेला वर्ष में दो बार आयोजित होता है—एक बार चैत मास में रामनवमी से एकादशी तक और दूसरी बार कार्तिक मास में नवमी, दशमी और एकादशी के अवसर पर। वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ा यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और आपसी भाईचारे की मिसाल भी बन चुका है।

मेले के समापन के साथ ही श्रद्धालु अपने-अपने घरों को लौट गए, लेकिन उनके मन में बाबा के प्रति आस्था और अगले मेले का इंतजार साफ झलकता रहा। बेचू वीर धाम का यह मेला एक बार फिर अपनी भव्यता, बेहतर व्यवस्था और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ के चलते यादगार बन गया।

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