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मां अमिला देवी धाम में 15 दिवसीय मेला का आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
मां अमिला देवी धाम क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र
स्वतंत्र प्रभात संवाददाता
कोन / सोनभद्र -
मां अमिला देवी मंदिर क्षेत्र में आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सोनभद्र जिला के कोन थाना क्षेत्र में स्थित यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है, जहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। बतातें चलें कि पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यह मंदिर दूर से ही दिखाई देता है और यहां से आसपास का दृश्य भी बहुत सुंदर दिखाई देता है।

मां अमिला देवी धाम को लेकर लोगों में गहरी आस्था है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर बहुत प्राचीन है और यहां वर्षों से पूजा-पाठ और मेले की परंपरा चली आ रही है। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से माता के दरबार में दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के साथ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
चैत माह में लगता है 15 दिवसीय मेला मां अमिला देवी मंदिर पर हर वर्ष चैत माह में एकम तिथि से 15 दिनों तक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। मेले के दौरान मंदिर परिसर और पहाड़ी क्षेत्र में भारी भीड़ उमड़ती है। इस मेले में सोनभद्र के अलावा अन्य राज्यों जैसे झारखंड, बिहार,छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मेले के दौरान मंदिर परिसर में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण सहित कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मेले में खिलौने, मिठाई, श्रृंगार सामग्री, घरेलू सामान आदि की दुकानें लगती हैं, जिससे मेले का माहौल काफी आकर्षक हो जाता है। बच्चों और ग्रामीणों के लिए यह मेला विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
आस्था और परंपरा का प्रतीकमां अमिला देवी धाम केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। मेले के समय पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है और श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इस प्रकार पहाड़ी पर स्थित मां अमिला देवी धाम क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।


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