लखनऊ में ग्लूकोस फैक्ट्री के खिलाफ किसानों का आंदोलन, प्रशासन ने लिया संज्ञान — 10 अप्रैल तक समाधान का आश्वासन

नव भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल शुक्ला ने इस कार्रवाई को किसानों की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि......

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लखनऊ, 


राजधानी लखनऊ के कुंभरावा रोड स्थित पहाड़पुर क्षेत्र में संचालित एक ग्लूकोस फैक्ट्री को लेकर क्षेत्रीय किसानों में लंबे समय से आक्रोश व्याप्त था। किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषित पानी, जहरीली हवा और उससे प्रभावित होती भूमि के कारण खेती-बाड़ी बर्बाद हो रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।

इन्हीं समस्याओं को लेकर नव भारतीय किसान संगठन द्वारा 23 मार्च 2026 को बड़े धरना-प्रदर्शन की घोषणा की गई थी। हालांकि, इससे पहले ही 22 मार्च को प्रशासन हरकत में आया और प्रदूषण विभाग के अधिकारी जेपी मौर्य अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ महंगवां थाना पुलिस बल भी मौजूद रहा।

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टीम ने ग्लूकोस फैक्ट्री के पास जमा अत्यधिक प्रदूषित पानी का सैंपल लिया। इसके अलावा उतरौला गांव पहुंचकर वहां के नल के पानी का भी परीक्षण किया गया और उसकी गुणवत्ता की जांच की गई। अधिकारियों ने मौके पर किसानों की स्थिति का जायजा लिया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।

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निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि 10 अप्रैल 2026 तक क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त करने के लिए ठोस कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद फिलहाल प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को स्थगित कर दिया गया है।

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हालांकि, संगठन की ओर से स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 15 अप्रैल 2026 को फैक्ट्री के बाहर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।

नव भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल शुक्ला ने इस कार्रवाई को किसानों की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि संगठन की एकजुटता और निरंतर प्रयासों के कारण ही प्रशासन को संज्ञान लेना पड़ा। उन्होंने सभी अधिकारियों का धन्यवाद व्यक्त किया, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर समस्याओं को समझा, साथ ही संगठन के सभी पदाधिकारियों और किसानों का भी आभार जताया।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इससे न केवल खेती बल्कि पूरे क्षेत्र के जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अब सभी की नजरें 10 अप्रैल पर टिकी हैं, जब प्रशासन द्वारा किए गए वादों की असली परीक्षा होगी।

(रिपोर्ट: स्वतंत्र प्रभात मीडिया)

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