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फर्जी मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन: अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सरकारों को नोटिस
यह जनहित याचिका अधिवक्ता और भाजपा नेता Ashwini Kumar Upadhyay द्वारा दायर की गई है। उन्होंने स्वयं अदालत में अपने पक्ष की पैरवी करते हुए कहा कि फर्जी मुकदमों के कारण ईमानदार लोग भय के माहौल में जी रहे हैं और न्याय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
नई दिल्ली।
झूठी शिकायतों और फर्जी आपराधिक मुकदमों के बढ़ते मामलों पर Supreme Court of India ने गहरी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का दुरुपयोग रोकना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे निर्दोष लोगों का उत्पीड़न होता है और अदालतों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है।
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए अदालत के सामने आया है, जिसमें झूठी शिकायतों, फर्जी गवाही और मनगढ़ंत सबूतों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी, भले ही इसके लिए उसकी आलोचना क्यों न हो।
किसने दायर की याचिका
यह जनहित याचिका अधिवक्ता और भाजपा नेता Ashwini Kumar Upadhyay द्वारा दायर की गई है। उन्होंने स्वयं अदालत में अपने पक्ष की पैरवी करते हुए कहा कि फर्जी मुकदमों के कारण ईमानदार लोग भय के माहौल में जी रहे हैं और न्याय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
Read More फार्मर आईडी के बिना भी मिलती रहेगी पीएम किसान की किस्त, कृषि विभाग ने दूर की किसानों की चिंतायाचिका में कहा गया है कि कई बार सिविल विवादों को जानबूझकर आपराधिक मामलों में बदल दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर, जमीन विवाद जैसे मामलों को गंभीर आपराधिक धाराओं में बदल दिया जाता है या महिलाओं के माध्यम से छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसे झूठे आरोप लगाए जाते हैं।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि समाज में ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है।
अदालत ने कहा:
कई बार शिकायतकर्ता को पता ही नहीं होता कि उसके नाम से शिकायत दर्ज कर दी गई है।
प्रभावशाली लोग गरीबों के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर शिकायतें दर्ज करा देते हैं।
आपराधिक प्रक्रिया का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
पीठ ने यह भी कहा कि एक जागरूक समाज का निर्माण जरूरी है, जहां लोग एक-दूसरे के मौलिक अधिकारों का सम्मान करें और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दें।
कोर्ट ने दिया उदाहरण
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक हालिया मामले का उदाहरण दिया, जिसमें एक महिला ने खुद अदालत में आकर कहा कि एक राजनीतिक नेता का उसके केस से कोई संबंध नहीं है। महिला के नाम से नेता के खिलाफ फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई थी।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों से साफ है कि शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसे रोकने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं।
याचिका में दिए गए प्रमुख सुझाव
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के सामने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव रखे गए हैं:
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सूचना बोर्ड लगाने की व्यवस्था
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पुलिस थानों
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अदालतों
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पंचायत भवनों
में यह जानकारी प्रदर्शित की जाए कि झूठी शिकायत दर्ज कराने पर क्या सजा हो सकती है।
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अनिवार्य शपथ पत्र (Affidavit)
शिकायत दर्ज करते समय शिकायतकर्ता से आरोपों की सत्यता की पुष्टि करने वाला शपथ पत्र लिया जाए। -
कड़े कानूनी प्रावधान लागू हों
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झूठी गवाही
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फर्जी सबूत
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मनगढ़ंत शिकायत
के मामलों में मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए।
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सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि झूठी शिकायतों और फर्जी मुकदमों को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या योजना है।
मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है मामला
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अदालत इस मामले में सख्त दिशा-निर्देश जारी करती है, तो:
फर्जी मुकदमों में कमी आ सकती है
निर्दोष लोगों को राहत मिल सकती है
अदालतों का बोझ घट सकता है
न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है
यह मामला आने वाले समय में आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़े सुधार की दिशा तय कर सकता है।

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